राष्ट्र और विकास की अवधारणा

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संवेदना हमारे तत्व दर्शन में है और शक्ति समाज के संगठन और जन-जन के सशक्तिकरण में है। उच्च आध्यात्मिक मूल्यों से प्रेरित यही धर्म की अवधारणा है। यह हमारा विकास का सनातन मॉडल है। यह हमारी चिर परिभाषित राष्ट्रीयता है। भारत में राष्ट्र की अवधारणा मूलतः सर्व

टीजेएसबी बैंक डिजिटल बैंकिंग की ओर अग्रसर

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टीजेएसबी सहकारी बैंक भारत की प्रमुख सहकारी बैंको में से एक है। बैंक विगत ४६ वर्षों से अपने ग्राहकों का विश्वास जीत कर उनकी सेवा के लिए हमेशा तत्पर रही है। बैंक के पास अपने ग्राहकों को देने लिए लगभग सभी प्रकार के डिजिटल प्रोडक्ट जैसे ई-बैंकिंग, आएमपीएस,

नोटबंदी का एक्स-रे

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ओशो और नोटबंदी की बात करना बड़ा अटपटा लगेगा। लेकिन ओशो के चिंतन की गहराई में उतरे तो इसमें सिद्धांत पकड़ में आ जाएगा। ओशो ने कहा है, जब बदलाव या नवनिर्माण होता है तब सब कुछ उल्टा-पुल्टा हुआ लगता है। अराजकता का माहौल बन जाता है। पुरानी इमारत ध्वस्त हो जाती

काले धन का कुचला फन

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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ८ नवम्बर की रात को ५०० और १,००० रुपये के नोट बंद करने का जो ऐलान किया, वह पी. वी. नरसिंह राव के समय भारत की अर्थव्यवस्था को खोलने के निर्णय के बाद का सबसे बड़ा आर्थिक निर्णय था। जिस देश में आधी से अधिक अर्थव्यवस्था अब भी नकदी

आर्थिक सुनामी, जनता, और मीडिया

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पिछले माह देश ने एक भयंकर सुनामी का सामना किया। यह सुनामी प्राकृतिक नहीं वरन् मानव निर्मित थी। काला धन रखने वालों के होश उड़ाने वाली थी। जी हां! यह सुनामी आर्थिक सुनामी थी। ८ नवम्बर की रात प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने एक पत्रकार परिषद में कड़े शब्दों में

आर्थिक क्रांति का प्रारंभ

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ऐसा लग रहा है कि स्वाधीनता के ६९ वर्ष बाद भारत के इतिहास में वास्तविक अर्थ में आर्थिक सुधारों और क्रांति का पर्व आरंभ हो चुका है। इसकी साक्ष्य है मोदी सरकार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम। ५०० और १००० रु. के नोटों का निर्मौद्रिकरण कर के उन्हें रद्द कर देना।

बढ़ती महंगाई से संकट

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आने वाले दिनों में मुद्रा का संकट गहरा होने वाला है। यूरोप के ग्रीस जैसे ही इटली और स्पेन पर भी आर्थिक संकट गहराने का खतरा बढ़ता जा रहा है। ग्रीस की आर्थिक संप्रभुता अब खतरे में है। यूरोपीय बैंक उसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं। परंतु, ग्रीस के नए बाँड्स खरीदने के लिए कोई तैयार नहीं है।

टूर आपरेटर सेवा में कमी का दोषी

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अपने परिवार के साथ हम हंसी-खुशी से छुट्टियां बिताने के लिए टूर पर जाते हैं। इसलिए हम चाहते हैं कि टूर तनाव रहित हो और मजे वाला हो। यदि टूर आपेरटर की लापरवाही से हमें मुश्किलें पैदा होती हैं तो लगता है,

गरीबी रेखा बनाम संपन्नता रेखा

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20 रुपया प्रतिदिन आय में इससे अधिक कुछ नहीं खरीदा जा सकता है। देश की 77 फीसदी जनसंख्या को यह 20 रूपये प्रतिदिन की दैनिक आय (योजना आयोग के अनुसार 37 प्रतिशत) भी उपलब्ध नहीं है।

आई लव यू विज्ञापन

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प्रचार के पीछे भागना अच्छा नहीं माना जाता। आप अपने गुणों का खुद ही प्रचार करते फिरे इसकी अपेक्षा दूसरे आपके गुणों की तारीफ करें यह अच्छा माना जाता है। परंतु, आज की इस स्पर्धात्मक दुनिया का कायदा ही कुछ अलग है।

बैंक शेयरों में उछाल की उम्मीद

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दुनिया की अर्थनीति में मुद्रा और मंडी का बहुत महत्व है और भारत की अर्थनीति उससे अलग नहीं रह सकता। यूरोप के कई देशों में स्थिति हाथ से बाहर निकल गयी है। यूनान जैसे देशों को अतंरराष्ट्रीय मुद्रा निधि ने ज्यादा ऋण देने का प्रबंध किया है। लेकिन उससे फर्क नहीं पड़ेगा।

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