‘नव भारत’ निर्माण करने का अवसर

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स्वतंत्रता के 75 वर्षों के पश्चात् भी अगर देश का बुद्धिजीवी समाज हीन भाव से ग्रसित है तो उसका सर्व प्रमुख कारण हमारी शिक्षा नीति रही जिसमें हमें पश्चिम का भक्त होना सिखाया गया। पर पिछले एक दशक से जनमानस में स्व का भाव जाग्रत हुआ है क्योंकि प्रधान मंत्री ने अपने हर क्रिया-कलाप से राष्ट्र के स्व को जगाने का प्रयास किया है।

महिला अधिकार भारत से पीछे है अमेरिका

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विश्व के किसी भी देश में मानवाधिकार उल्लंघन की छोटी सी घटना होते ही अमेरिका उस देश मात्र को मानवाधिकार नियमों की घुट्टी पिलाने लगता है जबकि अपने यहां महिलाओं और अश्वेतों के विरुद्ध हो रहे अत्याचारों और उनके अधिकारों के प्रति आंख मूंद लेता है। वहां पर महिलाओं की दशा को बताने के लिए इतना ही काफी है कि कोई भी महिला अभी तक राष्ट्रपति के पद तक नहीं पहुंच पाई है।

नेता बदले लेकिन रिश्तों पर आंच नहीं

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भारत के बढ़ते आर्थिक और सामरिक कद की वजह से विश्व के बड़े राष्ट्रों में लगातार हो रहे सत्ता परिवर्तन और भारत मित्र सत्ताधीशों की विदाई के बावजूद भारत पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ा है बल्कि कई देशों में वर्तमान शासनाध्यक्षों ने भारत के साथ सम्बंधों को मजबूत करने की दिशा में ज्यादा तत्परता दिखाई है।

अतिवादी शिक्षा पर लगे अंकुश

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बंटवारे के समय करोड़ों मुसलमान पाकिस्तान नहीं गए क्योंकि उनकी गर्भनाल यहां से जुड़ी हुई थी। राष्ट्र के विकास और रक्षा के लिए भी हमेशा तत्पर रहे परंतु संविधान में सेक्युलर शब्द जोड़ दिए जाने और सरकारों द्वारा प्रश्रय पाने के बाद कठमुल्लाओं ने लोगों को भड़काना शुरू किया और मुख्यधारा से काटकर रख दिया।

भ्रम न पालें जन अपेक्षाओं को समझें

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शिवसेना के हिंदुत्ववादी धड़े का एक हिंदुत्ववादी दल के साथ मिलकर महाराष्ट्र की सत्ता को व्यवस्थित करना अच्छा संकेत है लेकिन हिंदुत्व का सही अर्थ है, हाशिए पर खड़े अंतिम व्यक्ति तक विकास कार्यों को पहुंचाना। एकनाथ और देवेंद्र के पास ढाई वर्षों का भरपूर समय है इसलिए इसका उपयोग समाज के प्रत्येक वर्ग के समग्र विकास हेतु होना चाहिए।

अमृत महोत्सव और युवा

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आजादी का अमृत महोत्सव मनाते हुए हमें यह भी देखना होगा कि अभी हम कितनी दूर आए हैं और भारत को विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित करने के लिए कैसे और बढ़ना है। आज का युवा भविष्य का पथ प्रदर्शक है। 75वर्ष का भारत नए सपनों, नई ऊर्जा और नई प्रतिबद्धता के साथ एक नए भारत की घोषणा है।

भारत का ‘मिशन 2030’

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वर्तमान सरकार की जन सहयोगी और प्रगतिशील नीतियों ने विविध क्षेत्रों में अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। बढ़ती जनसंख्या के लिए रोजगार सृजन से लेकर प्रदूषण कम करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वाहनों को बढ़ावा देने और सौर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग जैसी नीतियां भविष्य के बदलाव की द्योतक हैं।

कोरोनामिक्स भारत बन सकता है चीन का विकल्प

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कोरोना महामारी के बाद वैश्विक कम्पनियां बहुत तेजी से चीन छोड़ रही हैं। भारत के लिए यह एक सुनहरा अवसर है। वर्तमान सरकार की नीतियां और टैक्स में छूट की अवधारणा इस मामले में सोने पर सुहागा साबित होगी। अब आवश्यकता है तो सरकार द्वारा की जा रही सार्थक पहल को और तेज करने की, ताकि इस मौके का लाभ भारत को बड़े स्तर पर मिल सके।

कई क्षेत्रों में भारत ने बनाया नया मुकाम

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स्वतंत्रता के बाद से ही औद्योगिक और रक्षा क्षेत्र में भारत ने अपने पंख फैलाने शुरू कर दिए थे परंतु पिछले एक दशक में अभूतपूर्व तेजी देखने को मिली है। पूरे विश्व की दृष्टि अब भारत पर लगी है। प्रगति की गति यूं ही रही तो भारत को दोबारा विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता।

वैश्विक क्षितिज पर भारतीय सूर्योदय

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पिछले कुछ वर्षों में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवाई है। वैसे तो भारत शुरू से ही किसी गुट में जाने से बचा रहा लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान सभी महाशक्तियों की दृष्टि हमारी ओर ही रही। स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव वर्ष एक संकल्प पत्र की भांति है, कि आने वाले वर्षों में भारत सर्व प्रमुख ‘सुपर पावर’ बन कर उभरे।

समूल नाश ही है अलगाववाद का स्थायी इलाज

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पीएफआई की ही भांति देश की सीमा के भीतर बहुत सारे अलगाववादी संगठन अपने गलत कार्यों को अंजाम देने के लिए तत्पर हैं। सरकार उन पर अंकुश लगाने अथवा समूल सफाए के लिए दीर्घकालिक अभियान चला रही है, लेकिन ऐसे संगठनों के सदस्य अन्य नामों से नया संगठन खड़ा कर लेते हैं। साथ ही, इन्हें बाहरी देशों और अलगाववादी संगठनोें से भी लगातार सहायता मिलती रहती है।

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