प्राचीन गौरव पाती अयोध्या

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अयोध्या को उसका प्राचीन गौरव दिलाने की युगांतकारी मुहिम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सत्ता में आते ही प्रारंभ हो गई थी। इस वृहद योजना का बहुत सा काम पूरा हो गया है। इसमें प्राचीन मंदिरों के जीर्णोंद्धार से लेकर इक्ष्वाकुपुरी ग्रीन सिटी की बसावट, राम कथा पार्क के विस्तारीकरण, राम की पैड़ी में निरंतर सरयू के जल प्रवाह तक अनेकों योजनाएं शामिल हैं।

अयोध्या में पीएम मोदी के हाथों हुआ शिलान्यास, पूरे देश में गूंजा जयश्री राम

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वर्षों से चली आ रही राम मंदिर की लड़ाई आज पूरी तरह से खत्म हो गयी। पीएम मोदी के शिलान्यास के साथ ही यह निश्चित हो गया है कि अब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होगा और युगों युगों तक याद रखा जायेगा।

राम मंदिर विश्व-बंधुत्व और मानवता के लिए वरदान

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 अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर के शिलान्यास के अवसर पर प्रसिद्ध साध्वी ॠतंभरा से ‘हिंदी विवेक’ ने विस्तृत बातचीत की। साध्वीजी ने श्री राम के जीवन मूल्यों, जन जन की आस्था, वैश्विक परिवार भाव आदि भारतीय संस्कृति के मूल मूल्यों पर समेत नई शिक्षा नीति पर भी अपने विचार प्रकट किए। प्रस्तुत है इसी के महत्वपूर्ण अंशः

रामो राजमणि सदा विजयते

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जिस प्रकार रावण जैसी दुष्ट प्रवृत्ति पर विजय प्राप्त कर भगवान श्रीराम अयोध्या वापस लौटे थे, उसी प्रकार आज भी समाज की दुष्ट प्रवृत्तियों का अंत कर प्रभु श्रीराम फिर एक बार अयोध्या लौट रहे हैं। मंदिर के शिलान्यास का दिन करोड़ों हिंदुओं के लिए गर्व और खुशी का दिन होगा।

जनजातियों के राम

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आज भी वनवासियों के ह्रदय में राम बसते हैं और जब तक संसार का अस्तित्व ही मानवता का अस्तित्व ही बनवासी जन अपने राम को हृदय में बसाए रखेंगे। छत्तीसगढ़ में तो राम का अधिकांश समय बीता है, इसलिए राज्य के वनवासियों आदर्श और आराध्य राम ही हैं।

बाबरी विध्वंस से पड़ी भव्य श्रीराम मंदिर की नींव

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“इसका मुझे बहुत आनंद है कि मैं उस समय कार सेवा में गया था। वह मेरे जीवन का अविस्मरणीय गौरवमय दिन था। मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे राम काज करने का मौका मिला। उस स्वर्णिम दिन को स्मरण कर गर्व की अनुभूति होती है।”

मर्यादा की हर कसौटि पर खरे उतरे राम

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’मर्यादा पुरुषोत्तम’ की उपाधि एक बहुत महान और कठिन कर्तव्य है, और प्रभु श्री राम जीवन के हर पड़ाव पर अपने इस कर्तव्य पर बिल्कुल खरे उतरे हैं।

लाखों हिंदुओं का बलिदान और 76 युद्ध –

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1528 में बाबर द्वारा अयोध्या में श्री राम मंदिर तोड़कर निर्माण की गई मस्जिद के विरोध में हिंदुओं का आंदोलन आरंभ हो गया था। इन पांच सौ वर्षों में अबतक हिंदुओं ने मंदिर की मुक्ति के लिए कोई 76 युद्ध लड़े और कई आंदोलन भी हुए। इनमें लाखों हिंदुओं का बलिदान हुआ। इन बलिदानों व आंदोलनों के कारण ही आज भगवान श्री राम भव्य मंदिर बन रहा है।

आओ मेरे राम तरस रही अखियां

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श्री राम जन्मभूमि मंदिर की और उसके फलस्वरूप उसके भूमि पूजन का भाव ही शरीर को रोमांचित करता है, मन को परमानंद की अनुभूति और बुद्धि को निर्मल करके कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। अतः यह संपूर्ण श्री राम जन्मभूमि आंदोलन की घटनाएं आज के युग में त्रेता युग की उन घटनाओं की बिम्ब ही प्रतीत होती हैं।

सिया राम मय अवनि अम्बर, और अयोध्या धुरी महत्तर

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जिन हिन्दुओं को, जिन भारतीयों को यह क्षण देखने, उसका साक्षी बनने, उसे अनुभव करने का सौभाग्य मिला है उस क्षण के सौभाग्य की तुलना सबके सहस्त्रों वर्षों के पुण्य से हो सकती है। यह भारत माता के प्रति अनन्य भक्ति का पुण्य है।

राम के जीवन मूल्य ही वर्तमान समस्याओं का हल                                

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प्रभु रामच्रद्र के दिव्य जीवन का आविष्कार यदि आज के समय हो गया तो श्रीराम का अयोध्या में बन रहा भव्य मंदिर सम्‍पूर्ण विश्व के लिए वरदान साबित होगा। सम्‍पूर्ण विश्व का हित साधने वाली भारतीय जीवन दृष्टि इस तरह पुनः उदित होकर विश्व में पहुंची तो आज का अशांत वैश्विक मानव कुछ शांति पा सकेगा और वर्तमान समस्याओं का बहुत बड़ी मात्रा में निराकरण हो सकेगा।

भव्य मंदिर, भव्य भारत

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अब हमें दैवी गुणों की संपदा निर्माण करनी है। प्रत्येक हिंदू व्यक्ति और उन व्यक्तियों से मिलकर बना समाज दैवी गुणों संपन्न बनाना है। राम हमारी इसी राष्ट्रीय अस्मिता के प्रतीक हैं। भव्य मंदिर याने भव्य भारत, यह हमारी दिशा है।

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