भोंसला मिलिट्री स्कूल

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धर्मवीर डॉ. बालकृष्ण शिवराम मुंजे ने अंग्रजों के विरुद्ध सशस्त्र क्रांति में भाग लिया। वे कुशाग्र बुद्धि थे। वे जानते थे कि अगर देश को स्वतंत्र कर उसे शक्तिशाली, स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर बनाना हो तो युवाशक्ति को संस्कारित करना होगा।

हिंदू दर्शन की सुगंध ‘योग’

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पिछले माह एक छोटी सी खबर ने मेरा ध्यान आकर्षित किया। इस खबर का शीर्षक था, ‘योग यानी हिंदू धर्म प्रचार नहीं !’ यह राय भारत के किसी मनीषी की नहीं; कैलिफोर्निया के एक न्यायाधीश की है।

गुलामी की आहट सुनो

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भारत में 1993 को नयी औद्योगिक नीति की घोषणा हुई। विदेशी ऋण चुकाने के लिए भारत का जून 1991 में 43 टन सोना गिरवी रखना पड़ा। बाद में अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई.एम.एफ.) ने भारत को 6.25 बिलियन डॉलर का ऋण दिया, किन्तु साथ-साथ अपनी शर्तें रखीं।

मिस्र व तुर्की में उफनता जन आक्रोश

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इस्लामी दुनिया के दो प्रमुख देशों मिस्र व तुर्की में इस्लाम के नाम पर सत्ता में आयी ताकतों के खिलाफ जन आक्रोश उफान पर है। मिस्र में तो दो साल पहले हुई कामयाब क्रान्ति के बाद लोकतांत्रिक तरीके से चुने गये पहले राष्ट्रपति मोहम्मद मोरसी को पद से हटाकर नजरबन्द कर दिया गया है ।

भारत और धर्मनिरपेक्षता

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राजनैतिक क्षेत्र में जिधर देखो उधर धर्मनिरपेक्षता शब्द चर्चा में है। हर बड़ा नेता अपने को दूसरे से बड़ा धर्मनिरपेक्ष सिद्ध करने में लगा है। संसद में अनेक तरह के कानून बनते हैं, अनेक विषयों पर चर्चाएं हुई हैं,

विजय का विकल्प विजय ही

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एक वरिष्ठ नेता से हुई मुलाकात के दौरान सहज ही 2014 में होनेवाले चुनावों का विषय निकला। चर्चा में मुद्दा आया कि क्या भाजपा 2014 के चुनावों में सब से बड़ी पार्टी के रूप में उभरेगी और केन्द्र में सत्ता पर काबिज होगी?

स्वामी विवेकानन्द की राष्ट्रीय प्रेरणा

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सन 1863 के प्रारम्भ में, 14 जनवरी को स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ। उस समय देश की परिस्थिति कैसी थी? 1857 की क्रान्ति की ज्वालाएं बुझ रही थीं। यह युद्ध छापामार शैली में लगभग 1859 तक चला।

उत्तराखण्ड आपदा में संघ सेवा कार्य

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15, 16 जून को उत्तराखण्ड में लगातार दो दिनों तक हुई भारी व व्यापक वर्षा से राज्य में जैसे महाप्रलय ही आ गया था जहां केदारनाथ में हजारों लोग पानी और गाद के साथ बह गये, वहीं भारी चहल‡पहल वाले रामबाड़ा कस्बे का निशान तक मिट गया।

स्वतंत्रता के प्रेरणादायी स्वर

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 क्या आपने सृष्टि के गीतों को सुना है ? सृष्टि में होने वाली एक छोटी सी हलचल भी संगीत को जन्म देती है। ये संगीत ही तो है, जो सृष्टि में जड़ और चेतन के भेद का आभास कराती है। इसी भावना को जब हम कैद करते हैं शब्दों में... रूप देते हैं अक्षरों का... तो वो संगीत ही काव्य बन जाता है।

हो रहा है भारत निर्माण?

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स्वाधीनता के बाद आई तीन पीढ़ियों में उठ खड़े होने का जज्बा क्या खत्म हो गया? इस प्रश्न को उठाने का तात्पर्य नैराश्य जगाना नहीं है, लेकिन यह बताना है कि हमें जागृत होना पड़ेगा। समझना पड़ेगा कि देश में विकास के बदले विनाश की स्थिति पैदा करने वालों को कैसे पाठ पढ़ाया जाए। लोकतंत्र में चुनाव के जरिए सीख दी जाती है और यह रणक्षेत्र करीब ही है।

प्रजा परिषद आन्दोलन के साठ साल

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जम्मू-कश्मीर के पिछले छह दशकों के इतिहास में दो आन्दोलन सर्वाधिक महत्वपूर्ण आन्दोलन कहे जा सकते हैं। मुस्लिम कान्फ्रेंस/नैशनल कान्फ्रेंस का 1931 से लेकर किसी न किसी रूप में 1946 तक चला, महाराजा हरि सिंह के शासन के खिलाफ आन्दोलन, जिसका अन्तिम स्वरूप ‘डोगरो कश्मीर छोडो’ में प्रकट हुआ।

हिंदू धर्म नहीं, जीवन प्रणाली

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सर्वोच्च न्यायालय के अनेक फैसलों में हिंदू को धर्म नहीं, अपितु जीवन प्रणाली माना गया है। हिंदू यदि धर्म न हो और हिंदू एक जीवन प्रणाली हो तो हिंदू कानून को समान नागरी कानून मानकर भारत में रहने वाले, स्वयं को भारतीय कहलाने वाले हरेक को वह लागू होना चाहिए। सभी धार्मिक समूहों को भी वह लागू होना चाहिए।

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