संगीत भारतीय जीवन की आत्मा है। यह संगीतमय भाषा अपने आप में पूर्ण है। यह अधिक सांस्कृतिक है। विभिन्न भाषी...
****डॉ. प्रज्ञा शिधोरे***** हमारे सोलह संस्कारों के साथ भी संगीत का बड़ा महत्व है। यह परंपरा प्राचीन काल से चली...
****सुरभि******* सुर ना सधे क्या गाऊं मैं नवरसों में से हर रस हमें संगीत में मिल जाता है। गुस्से में संगीत...
सं स्कृत में प्रसिद्ध कहावत है, ‘संगीताद् भवति संस्कार :। ’ केवल मानवी जीवन में ही नहीं अपितु पशु -पक्षी,...
भारत का लोक संगीत ग्रामीणांचल, वनांचल और गिरिअंचलों में पसरा पड़ा है। जितने विविध क्षेत्र उससे भी अधिक तरह के...
लोग या तो सिर्फ गायक होते हैं, या वादक, या फिर सिर्फ धुनों के सर्जक संगीतकार -और यह सब काम...
नम्रता, प्रमोद, शौर्य, ऋणस्वीकार आदि अनेक भावों का निर्माण करने वाली स्वर रचनाएं संघ के घोष को अधिकाधिक सार्थक बनाती...
‘मिले सुर मेरा तुम्हारा ... ’’ के बाद हमने ‘‘बने सरगम हर तरफ से गूंजे बनकर। ’’ जिंगल बनाया। ‘‘मिले...
;इलेक्ट्रोनिक इस्ट्रूमेंट या आधुनिक तकनीक हमारे वाद्यों के लिए, हमारे संगीत समाज के लिए बहुत ही खतरनाक है। दस इस्ट्रूमेंट...
बिना वाद्य संगत के काव्य एकदम नीरस लगता है, गद्य हो जाता है और वहीं उसके साथ संगत हो जाए...
शुभ कार्यों में घर के दरवाजे के पास बजने वाली शहनाई लोक वाद्य को शास्त्रीय संगीत के केंद्र में लाकर...
पार्श्वगायन के क्षेत्र में बहुत स्पर्धा है। पहले जैसी ‘मोनोपली’ अब नहीं रही। रोज एक नई आवाज से पहचान होती...
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