ऋषि और कृषि, भारतीय ग्राम्य संकल्पना और व्यवस्था के आधार रहे हैं| इस परंपरा ने केवल मानव को जीवन जीना...
मैं बुन्देलखण्ड के एक गांव की चौपाल हूं। यहां की स्थानीय बोली में चौपाल को ‘अथाई’ कहते हैं जो शायद...
आज की पत्रकारिता व्यावसायिक है, शहरी हो गई है| ग्रामीण पत्रकारिता अपने अस्तित्व की चुनौती से जूझ रही है| पत्रकारिता...
म.गांधीजी केवल अतीत के ही नहीं वरन् भविष्य के भी मार्गदर्शक हैं| उनके संदेश अमर हैं एवं वे तब तक...
ग्राम विकास’ शब्द आजकल सभी ओर छाया हुआ है। भारत गांवों का देश होने के कारण यदि गांवों का विकास...
जलगांव स्थित गांधी रिसर्च फाउण्डेशन समग्र गाम विकास को मूर्त रूप देने में लगा हुआ है| इसके तहत रास्ते, क्लास...
यदि सचमुच देश का विकास करना है तो इसकी शुरूआत ग्राम स्तर से की जानी चाहिए| इसके लिए सरकार के...
वैदिक ग्रामों में जीवन को सुंदर बनाने तथा पुरुषार्थ को प्राप्त करने के साधनों की न्यूनता नहीं थी| यहां तक...
प्रचलित विकास से बनी परिस्थिति से आज देश अशांति की ओर बढ़ रहा है| भारतीय विकास चिंतन के प्रकाश में...
स्वाधीनता आई, भारत गणतंत्र बना, किन्तु ग्रामों की स्थिति में कोई विशेष परिवर्तन नहीं आया| गांवों में रहने वाले करोड़ों...
भारत की संस्कृति की रक्षा में तथा उसे जीवित रखने में हमारे गांवों का बहुत बड़ा योगदान है| आज भी...
भारतीय जीवन रचना के अनुसार हर ग्राम की एक देवता होती है। ग्राम का जो निर्धारित क्षेत्र है, उस पर...
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