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बिहार रचेगा नया इतिहास

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सारे विरोधी, विपक्षी दल मोदी से लड़ रहे हैं। उनकी वापसी रोकने के मुद्दे पर सब एक हैं। भले ही महागठबंधन बनाने के उनके प्रयास निजी स्वार्थ और हितों की भेंट चढ़ गए। बहरहाल, उ.प्र. में बुआ-बबुआ का गठजोड़ नए समीकरण बना रहा है, जबकि बिहार एनडीए को इतनी सीटें देगा कि नया इतिहास रचेगा।

महाराष्ट्र में चार गठबंधनों का समर

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महाराष्ट्र में चार गठबंधन बने हैं- एक- भाजपा-शिवसेना, दो- कांग्रेस-राकांपा, तीन- प्रकाश आंबेडकर व ओवैसी की वंचित बहुजन आघाड़ी और चार- सपा-बसपा।

दिल्ली और हरियाणा में कांटे की टक्कर

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दिल्ली में केजरीवाल की पार्टी कांग्रेस से गठबंधन करने पर उतारू थी, पर खेल नहीं जम पाया। इसलिए वहां अब तिकोना संघर्ष है। उधर हरियाणा में भी कई सीटों के लिए कांटे की टक्कर होगी।

नाशिक कुंभ का नियोजन

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सन 2027 और उसके बाद भी कुंभ मेले का केंद्र बिंदु मूल रामकुंड यानी रामघाट ही रहने वाला हैं। रामकुंड एवं लक्ष्मण कुंड को एकरूप किया गया है। इस कुंड का और विस्तार किया जाएगा। शाही मार्ग को चौड़ा करके न्यूनतम 30 मीटर यानी 100 फुट बनाया जाएगा। गोदावरी मैया तक पहुंचने वाली अन्य सड़कें भी चौड़ी कर जाएगी।

फिल्मों में बढ़ता देशभक्ति का ज्वार

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आज जिस प्रकार समाज में राष्ट्रीय विचारों की, देशभक्ति की, सेना के प्रति आदर की प्रबल भावना दिखाई देती है, उसका ही प्रतिबिम्ब फिल्मों में भी दिखता है।

महात्मा के पुत्र हरिलाल

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गांधीजी की अपने बड़े पुत्र हरिलाल से कभी नहीं पटी। इससे हरिलाल व्यसनों और नशे के अधीन हो गए। मां से उनके अंतिम क्षणों में मिलने आए हरिलाल के पैर इतने लड़खड़ा रहे थे कि दो लोगों को उन्हें पकड़कर बाहर ले जाना पड़ा। हरिलाल की मौत हुई तब उनकी पहचान थी- सिफलिस रोगी, मुर्दा नं.8। गांधीजी के जीवन की इससे बड़ी शोकांतिका और क्या होगी?

पूरब से आतीभाजपा क्रांति

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पूरे देश के लोकसभा चुनाव पर गौर करें तो भाजपा के नेतृत्व में एनडीए के विजय की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। भाजपा को उत्तर में हो रहे घाटे को इस बार पूरब पूरा करते दिखाई दे रहा है।

आना तो मोदी को ही है।

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अभी तक हुए मतदान से बहुमत किस दिशा में जा रहा है इस बारे में एकदम कोई स्पष्ट निष्कर्ष निकालना कठिन है। यह पूरा चुनाव दो विपरीत विचारधाराओं के बीच का चुनाव बन गया है। विपक्षी दलोंं की भूमिका से इस चुनाव का मूल स्वर नरेन्द्र मोदी हटाओ और नरेन्द्र मोदी को बनाए रखो बन चुका है।

राष्ट्रद्रोही विचारों की पराजय निश्चित

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यह सम्पादकीय जब तक आप तक पहुंचेगा तब तक तीसरे या चौथे चरण का मतदान हो चुका होगा। भारत की सत्रहवीं लोकसभा के लिए प्रचार भी आधा रास्ता तय कर चुका होगा। हर राजनीतिक दल अपने प्रतिस्पर्धी की कमोबेशी उजागर कर चुका है। अब जनता परिणामों के प्रति उत्कंठा रखती है। ये परिणाम कैसे होंगे? कौन जीतेगा? अगली लोकसभा में बलाबल कैसे होगा? इस बारे में चर्चा धीरे-धीरे गर्म होती जाएगी।

मई २०१९ का हिंदी विवेक मासिक पत्रिका अंक प्रकाशित

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आकर्षक रंगीन कवर पृष्ठ और आंतरिक साज-सज्जा से सुशोभित हिंदी विवेक मई माह 2019 के अंक में प्रखर राष्ट्रवाद व देशभक्ति के माहौल में पुरे देश भर के चुनावी परिणाम क्या हो सकते है इसका सटीक आकलन किया गया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह मा.श्री भैयाजी जोशी जी का साक्षात्कार तथा 2019 लोकसभा चुनाव पर संघ की भूमिका स्पष्ट रुप से प्रकाशित हुई है। राष्ट्रद्रोही विचारों की पराजय निश्चित नामक शीर्षक से प्रकाशित सम्पादकीय बेहद प्रभावकारी और उल्लेखनीय है। गोवा में हिंदू स्मृति का जागरण,फिल्मों में बढ़ता देशभक्ति का ज्वार तथा गांधीजी और संघ-एक अवलोकन के साथ ही बच्चों -महिलाओं के लिए विशेषकर फैशन,कार्टून एवं मनोरंजक कहानियां बरबस ही पाठकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

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