आत्मनिर्भर भारत का वैचारिक अधिष्ठान

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हमें पश्चिमी प्रतिमानों या उदाहरणों का गहराई से अध्ययन विश्लेषण करना चाहिए और यदि संभव हो तो उनसे लाभ भी उठाना चाहिए। लेकिन उन्हें अपने भावी विकास का आदर्श प्रतिमान मानने की गलती नहीं करनी चाहिए। आत्मनिर्भरता का वैचारिक अधिष्ठान यही है।

संगीत है तो मैं हूं और मैं हूं तो संगीत है- शंकर महादेवन

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‘हिंदी विवेक’ द्वारा आरंभ आत्मनिर्भर भारत वीड़ियो सीरिज के अंतर्गत इस बार खास वेब-भेंटवार्ता हैं प्रसिद्ध गायक-संगीतकार शंकर महादेवन से। उनसे संगीत की दुनिया के अलावा, उनके परिवार, आने वाले युवा गायकों, उनकी गीता पर महत्वाकांक्षी संगीत परियोजना आदि संगीत क्षेत्र के विभिन्न विषयों पर हुई अंतरंग बातचीत के कुछ सम्पादित महत्वपूर्ण अंश यहां प्रस्तुत हैं-

भारतीय नजरिया ही संविधान की मौलिकता

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प्रसिद्ध संघ विचारक और लेखक श्री रमेश पतंगे ने वेब पर ‘हिंदी विवेक’ की आत्मनिर्भर भारत भेंटवार्ता शृंखला के दौरान जो सबसे मार्के की बात कही वह यह कि देश के संविधान को भारतीय नजरिये से देखना चाहिए, न कि पश्चिम के नजरिये से। तभी हमारे संविधान की मौलिकता का पता चल जाएगा। हमारा संविधान समानता और न्याय की बात करता है। इस पर ठीक से अमल हो तो भारत आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ेगा। प्रस्तुत है इस प्रदीर्घ मुलाकात के कुछ महत्वपूर्ण सम्पादित अंशः-

ग्रामीण भारत को वास्तविक भारत में बदलने की जरूरत

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हमारा नेतृत्व दुनिया को दिशा देने में सक्षम है और हमारे आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता को स्थायित्व देने में भी। पहल तो हमें ही करनी होगी। ग्रामों को रोजगार अनुकूल बनाकर ही देश को उन्नत किया जा सकता है।

विदेशी भाषा अधिगम – आत्मनिर्भरता की सौगात

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छठी पीढ़ी का युद्ध परमाणु युद्ध न होकर साइबर, मेडिकल या आर्थिक युद्ध होना है। इसलिए हमारे युवकों को विश्व के लगभग सभी विकसित देशों की भाषाओं का सामान्य परिचय कराना बहुता जरूरी है। विदेशी की भाषा का यह अधिगम हमारे लिए आत्मनिर्भरता की सौगात ही होगा।

युवाओं को ‘कंफर्ट जोन’ से बाहर निकलना चाहिए

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‘हिंदी विवेक’ द्वारा आरंभ आत्मनिर्भर भारत वेब-भेंटवार्ता की शृंखला में लद्दाख के एकमात्र युवा सांसद श्री जमयांग सेरिंग नामग्याल से युवा शक्ति और लद्दाख में अनुच्छेद 370 हटने के बाद आए बदलावों पर व्यापक बातचीत हुई। इस बातचीत के कुछ सम्पादित महत्वपूर्ण अंश यहां प्रस्तुत हैं-

आत्मनिर्भरता में मातृशक्ति का योगदान

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भारत को आत्मनिर्भर बनाने के स्वप्न के साथ, अपने जीवन लक्ष्य को, कर्म को जोड़ दें। इसे सब में हमारे परिवार धुरी का केंद्रबिंदु हमारी मातृशक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है। आत्मनिर्भरता का मानक सुख व आनंद की उपलब्धि है।

स्वास्थ्य का मूलाधिकार आत्मनिर्भरता की बुनियाद

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मोदी सरकार ने जिस राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति को 2017 में लागू किया है उसके मूल प्रारूप में ’जनस्वास्थ्य’ को शिक्षा और खाद्य की तरह बुनियादी अधिकार बनाने का प्रस्ताव था; लेकिन राज्यों के कतिपय विरोध के चलते इसे विलोपित कर दिया गया। कोरोना महामारी के अनुभव ने हमें अब पुनः इस पर नए सिरे से सोचने पर मजबूर किया है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में हम तभी आत्मनिर्भर बन सकते हैं, जब स्वास्थ्य को हम नागरिकों का बुनियादी अधिकार मानें।

आत्मनिर्भरता में मनोरंजन क्षेत्र की भूमिका

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आज भारत को आत्मनिर्भर बनाने की बात हो रही है। उसी स्वर्णिम गौरव शाली वैभव को वापस पाने की बात की जा रही है जब हमारे देश को सोने की चिड़िया कहा जाता था। इस स्वप्न को साकार करने में मनोरंजन जगत की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है।

आत्मनिर्भर उत्तराखंड

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देवभूमि उत्तराखंड को रोजगारोन्मुख बनाकर आत्मनिर्भर बनाने के लिए त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने कई योजनाओं की घोषणा की है। इस तरह राज्य अपनी आत्मनिर्भरता के साथ देश की आत्मनिर्भरता में योगदान कर रहा है।

देश हार्डवेयर में भी जल्द आत्मनिर्भर बन सकता है

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‘हिंदी विवेक’ द्वारा आरंभ ‘आत्मनिर्भर भारत’ वेब शृंखला के अंतर्गत एक विशेष भेंटवार्ता हैं भारत में सुपर कंप्यूटर के जनक प्रसिद्ध वैज्ञानिक श्री विजय भटकर से। उनसे आईटी के क्षेत्र में हुए तेज बदलावों, और अगले लक्ष्यों समेत कंप्यूटर हार्डवेयर के क्षेत्र में भी तेजी लाने पर विस्तृत बातचीत हुई। उनका कहना है कि सॉफ्टवेयर में हमने बाजी मार ली है, लेकिन हार्डवेयर में बहुत कुछ करना बाकी है। हम आत्मविश्वास दृढ़ करें तो अगले तीन-चार साल में ही इस क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं। उनके विचारों के कुछ सम्पादित महत्वपूर्ण अंश यहां प्रस्तुत हैं-

विज्ञान और तकनीकी उन्नति के संग भारत की आत्मनिर्भरता

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आत्मनिर्भर भारत मिशन का लक्ष्य दुनिया के देशों से परस्पर साझेदारी-सहयोग को आगे बढ़ाते हुए भारत को अपने पैरों पर खड़े होने का है। इस नए आगाज में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश और तकनीक का स्वागत है।

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