डेटिंग ऐप प्यार धोखा खतरा

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इस राष्ट्रीय बालिका दिवस पर हम सबको यह प्रण लेना चाहिए कि हम अपनी बहन-बेटियों को डेटिंग ऐप्स और लव जिहाद के चंगुल से बचाने की दिशा में सार्थक प्रयास करें। वरना वह समय दूर नहीं जब हर शहर में श्रद्धाएं टुकड़े हो रही होंगी और हमारे पास आंसू बहाने…

मातृत्व का आदर्श जीजाबाई

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राजमाता जीजाबाई का जीवन भारतवर्ष ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व के लिए प्रेरणास्पद है। उन्होंने अपने कर्तृत्व के माध्यम से सिद्ध कर दिया कि समाज की उन्नति के लिए अपनी संतति को सामने लाकर समाज को जाग्रत किया जाना पूर्ण सम्भव है। उन्होंने अपने जीवन काल में हिंदवी स्वराज की…

बिखरा पाकिस्तान पीओके कैसे संभाले

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पाकिस्तान में पंजाब के अलावा बाकी हिस्सों की हमेशा अनदेखी हुई है। साथ ही पीओके भी बदहाली का शिकार है। देश के लगभग हर हिस्से में अलगाव की आग जल रही है। भारत को इसका लाभ उठाकर अपने कश्मीर के बाकी बचे बदहाल हिस्से को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। पीओके की वापसी अखंड भारत के यज्ञ की प्रथम समिधा साबित हो सकती है।

जन्नत, 72 हूरें और लव जिहाद

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श्रद्धा वालकर के केस ने लव जिहाद की भयानकता को अपने समूचे स्वरूप में समाज के सामने रख दिया है। अब समय आ गया है कि हम अपने घर की बेटियों को इन भेड़ियों की करतूतों के प्रति सचेत करें तथा उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से इतना सक्षम बनाएं कि आवश्यकता पड़ने पर मुंहतोड़ जवाब दे सकें।

पठान का विरोध राजनीतिक या सामाजिक

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शाहरुख खान की फिल्म ‘पठान’ के गाने बेशर्म रंग ने बॉलीवुड की समाज विरोधी मानसिकता को ही प्रदर्शित किया है। उन्हें अब भी लगता है कि वे बहुसंख्यक विरोधी भावों का जहर फैलाकर पैसे पीटेंगे। पर अब जितनी जल्दी वे लोग चेत जाएं, उतना ही अच्छा है अन्यथा समाज जाग्रत हो चुका है। लोग भावनाओं का अपमान सहन करने के लिए कत्तई तैयार नहीं हैं।

भारत के हाथों में वैश्विक मंचों का नेतृत्व

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वैश्विक स्तर पर भारत का बढ़ता कद विश्व शांति के लिए शुभ संकेत है। भारत के इस बढ़ते कदम से विश्व की शक्ति केंद्रित ध्रुवीकरण की राजनीति भी छिन्न-भिन्न हो रही है। वैश्विक उथल-पुथल के कारण भारत के लिए स्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं परंतु हर देश को भरोसा है कि भारत की नीयत साफ है इसलिए भारत हर राष्ट्र के हित में फैसले लेगा।

संविधान की मूल भावना का अंग है यूसीसी

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समान नागरिक संहिता समय की मांग है क्योंकि किसी धर्म विशेष को विशेषाधिकार दिया जाना संविधान की मूल आत्मा से छेड़छाड़ है। इस पर हो हल्ला मचाने वालों को जानना चाहिए कि बहुत सारे मुस्लिम राष्ट्रों में भी यह व्यवस्था लागू है तथा गोवा में भी यह कानून 1961 से ही लागू है।

आप की नजर 2029 पर

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राज्यों में चाहे कुछ भी होता रहा हो लेकिन राष्ट्रीय फलक पर मुकाबला हमेशा भाजपा और कांग्रेस जैसी विचारधारा वाली पार्टियों के बीच रहा लेकिन आम आदमी पार्टी जैसी विचारधारा विहीन पार्टी का राष्ट्रीय स्तर पर उभर कर आना अच्छा नहीं है। भाजपा की जिम्मेदारी बन जाती है कि वह देश की जनता को इन चीजों के प्रति सचेत करे।

बॉलीवुड के बेशर्म रंग

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‘बेशर्म रंग’ वैसे तो शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण अभिनीत नई फिल्म पठान का एक गीत मात्र है, जिसे लेकर पिछले कई दिनों में कई चर्चाएं हुई हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में बॉलीवुड का ही रंग ‘बेशर्म’ हो चला है। एक समय था जब फिल्मों को समाज का आईना कहा जाता था, फिल्म बनाने वालों…

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