सिनेमा में कॉमेडी- ये कहां आ गए हम!
‘सहज हास्य’ से ‘असहज हास्य’ और वहां से ‘अश्लीलता’ और वहीं से ‘फूहड़ता’ और फिर उसके नीचे ‘असहनीयता’ की ओर ...
‘सहज हास्य’ से ‘असहज हास्य’ और वहां से ‘अश्लीलता’ और वहीं से ‘फूहड़ता’ और फिर उसके नीचे ‘असहनीयता’ की ओर ...
इस वर्ष का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को है। इस वर्ष की थीम है- स्त्री और चुनौतियां। पिछले लगभग ...
भारत को एक पुरुष प्रधान देश के रुप में देखा गया है। सदियों से यहां पुरुष बाहरी काम काज देखते ...
एक दौर था जब ममता बनर्जी बोलती थीं तो पश्चिम बंगाल के लोग गंभीरता से उनकी बातों को सुनते थे ...
अगले कुछ महीने में पश्चिम बंगाल और असम सहित चार राज्यों में चुनाव होने वाले है। सभी राजनीतिक पार्टियाँ अपना ...
नए केंद्रीय बजट में ऐसे अनुकूल प्रावधान हैं, जिनसे कोरोना महामारी के नकारात्मक प्रभावों से बैंकिंग क्षेत्र और भारतीय अर्थव्यवस्था ...
माइक्रो ब्लॉगिंग सोशल मीडिया साइट्स ने संवाद के स्थान पर अफवाह के तंत्र को मजबूत करने का काम किया है। ...
यह समझ सभी में निर्माण होने की आवश्यकता है कि अध्यात्म को अपंग एवं विज्ञान को अंधा बनाने से मनुष्य ...
संत रैदास के नेतृत्व में उस समय समाज में ऐसा जागरण हुआ कि उन्होंने धर्मांतरण को न केवल रोक दिया ...
19 वीं शताब्दी के प्रबोधनकाल के अधिकांश समाजसुधारक उच्चवर्णीय थे तथा उनके सुधार का विषय सफेदपोश शहरी थे। इस पार्श्वभूमि ...
“देश उबल रहा है, किसान उबल रहे हैं, अदालत उबल रही हैं मगर राजकुमार कहीं ठण्ड में दुबके बैठे हैं। ...
आज उम्र के 75वें पड़ाव पर श्री रमेश पतंगे जी की सम्पदा के खाते में केवल ईमानदारी लिखा हुआ है ...
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