मैं स्वतंत्र भारत बोल रहा हूं

Continue Reading मैं स्वतंत्र भारत बोल रहा हूं

“जिस स्वतंत्रता ने हमें अधिकार दिए हैं उसी स्वतंत्रता ने हमें दायित्व भी दिए हैं। हमारा पहला दायित्व है कि हम स्वयं को मानसिक गुलामी से स्वतंत्र करें। सम्प्रदाय, जाति, पंथ से परे होकर संगठित हों। अपने इतिहास, अपनी परंपरा, अपने महापुरुषों पर गर्व करना सीखें और अपनी नई पीढ़ी को भी सिखाए।”

स्वतंत्रता के बाद स्वावलंबन का प्रश्न

Continue Reading स्वतंत्रता के बाद स्वावलंबन का प्रश्न

उदारवादी आर्थिक नीतियों ने स्वावलंबन, स्वदेशी और रोजगार सृजन के संगठित क्षेत्र में नए अवसरों पर विराम लगा दिया। समय के साथ स्वावलंबन और बेरोजगारी के संकट भी विस्तृत होते गए। इससे पार होने की मोदी सरकार कोशिश कर रही है।

End of content

No more pages to load