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ग्रामीण सहकारिता और एनपीए की समस्या

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सहकारिता के क्षेत्र में सामाजिक भावना घटती जाना सहकारी बैंकों के समक्ष एनपीए की समस्या का मुख्य कारण है। यह भावना जागृत करने से ग्रामीण सहकारिता जीवित रहेगी एवं एनपीए की समस्या नहीं रहेगी। सहकार भारती के कार्यकर्ताओं के माध्यम से संस्कार का यह काम हो सकता है।

छोटे उद्योगों पर मंडराता संकट

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इस समय छोटे और मंझोले उद्योग, जिन्हें एमएसएमई कहते हैं, अपने सबसे बुरे दिनों में चल रहे हैं। अगर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया तो इस क्षेत्र की कई कम्पनियां बंद होंगी। उनमें एनपीए बढ़ेगा। किसानों की तरह इनके  भी आत्महत्या करने के दिन आ जाएंगे।

देश को लूट लिया इन घोटालेबाजों ने

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जिस देश में बैंक का कर्ज चुका न पाने के कारण एक तरफ किसान आत्महत्या को बाध्य होते हों वहां बैंकों को हजारों करोड़ की चपत लगाने वाले पूंजीपति कानून को ठेंगा दिखाते हुए भोग-विलास कर रहे हों तो बात सोचने की हो जाती है। हर्षद मेहता, केतन पारेख से लेकर नीरव मोदी और मेहुल चोकसी तक ऐसे घोटालेबाजों की सूची पहुंचती है।

बैंकिंग क्षेत्र में सुधार लाने की पहल करता बजट

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मोदी सरकार बैंकिंग क्षेत्र में सुधार लाने के लिए गंभीरता से प्रयास कर रही है। ...सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुनर्पूंजीकरण हेतु पूंजी उपलब्ध कराने, आईबीसी के तहत वसूली में तेजी लाने और बैंकों के एकीकरण से बैंकों की सेहत में सुधार आएगा।

मैं स्वतंत्र भारत बोल रहा हूं

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“जिस स्वतंत्रता ने हमें अधिकार दिए हैं उसी स्वतंत्रता ने हमें दायित्व भी दिए हैं। हमारा पहला दायित्व है कि हम स्वयं को मानसिक गुलामी से स्वतंत्र करें। सम्प्रदाय, जाति, पंथ से परे होकर संगठित हों। अपने इतिहास, अपनी परंपरा, अपने महापुरुषों पर गर्व करना सीखें और अपनी नई पीढ़ी को भी सिखाए।”

बड़े लक्ष्य और आम आदमी का सरोकार

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वर्तमान वर्ष के बजट में हमने जीडीपी में लम्बी छलांग लगाने समेत कई बड़े लक्ष्य रखे हैं। लेकिन आम आदमी के सरोकारों पर भी गौर करना होगा। यदि उसकी क्रय शक्ति न बढ़ी तो सारे प्रयास व्यर्थ हो जाएंगे। हालांकि, मोदी सरकार के आत्मविश्वास की स्पष्ट झलक बजट में दिखाई देती है। 

फिर उसी विश्वास के साथ वापस आऊंगा

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महाराष्ट्र में विधान सभा चुनावों का बिगुल बज चुका है। लोकसभा चुनावों की तरह इस चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी की भारी विजय संभावित है। इसका संकेत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विधान सभा के अंतिम सत्र में किए भाषण में पढ़ी एक कविता से मिलता है-  फिर एक बार उसी विश्वास के साथ, मैं वापस आऊंगा..।

ईरान को लेकर दो हिस्सों में विभाजित दुनिया

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अमेरिका के ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से अलग हो जाने के बावजूद रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी अभी भी इस समझौते से सहमत हैं। इसीलिए ईरान भी अमेरिका के खिलाफ तल्ख तेवर अपनाए हुए है। इसीलिए दुनिया को लग रहा है कि कहीं जंग का सिलसिला शुरू न हो जाए?

नए भारत में जातियता व्यवधान

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वर्णभेद, जातिभेद, अस्पृश्यता हमारे यहां उत्पन्न सामाजिक विषमता के कारण निर्माण हुए प्रश्न हैं। आज जब हम नया भारत निर्माण करने की दिशा में जाने का प्रयास कर रहे हैं तब इन प्रश्नों की ठोकर हमें लगनी ही है। नव भारत के लिए इन कुरीतियों को निर्मूल करना और सभी में एकत्व व बंधुभाव का निर्माण करना एक विशाल और राष्ट्रीय कार्य है, जिसे हमें करना ही होगा।

सम्पादकीय २०१९ – एनपीए- देश के समक्ष आर्थिक संकट

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बड़े पूंजीपतियों की ओर बैंकों के भारी बकाया कर्ज देश के समक्ष चिंता का विषय है। आए दिन बैंकों के घोटाले उजागर हो रहे हैं। इससे साफ दिखाई देता है कि बैंकिंग क्षेत्र संकट में है। वित्तीय क्षेत्र में कार्यरत बैंकों, बीमा कम्पनियों में देश के लाखों लोगों का धन लगा हुआ है। देश की अर्थव्यवस्था सुचारू रूप से चलनी हो तो बैंकों, बीमा कम्पनियों का ठीक से चलना आवश्यक है।

हिंदी विवेक मासिक पत्रिका अगस्त २०१९ का अंक प्रकाशित

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५ लाख करोड़ डॉलर की भारतीय अर्थव्यवस्था बनने की राह में कैसे है एनपीए रोड़ा ? किसे कहते है एनपीए ? देश की अर्थव्यवस्था पर एनपीए का प्रभाव, ग्रामीण सहकारी बैंक : एनपीए समस्या और समाधान, बैंकिंग क्षेत्र में सुधार की पहल करता बजट, मोदी जी की अर्थनीति, छोटे उद्योगों पर मंडराता संकट, नए भारत में जातीयता व्यवधान, मैं स्वतंत्र भारत बोल रहा हूं, संघ कार्य के भास्कर आदि अनेक प्रासंगिक लेख, आवरण कथा जानने – समझने हेतु अभी पढ़े अगस्त २०१९ माह का हिंदी विवेक अंक. ज्ञानवर्धन और बुद्धि विवेक की समृद्धि के लिए निरंतर पढ़े राष्ट्रवाद से परिपूर्ण पारिवारिक पत्रिका हिंदी विवेक ...

तीन तलाक के मुक्तिदाता मोदी

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मोदी सरकार के अथक प्रयास से सदियों पुरानी कुप्रथा तीन तलाक को ख़त्म कर इतिहास रच दिया गया है. लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी तीन तलाक बिल पास हो गया. बिल के समर्थन में ९९ और विरोध में ८४ वोट पड़े. अब तीन बार तलाक कह कर पत्नी से तलाक लेना संज्ञेय अपराध होगा. पीड़ित या परिवार के सदस्य एफआईआर दर्ज करा सकते हैं. एफआईआर दर्ज होने के बाद बिना वारंट के गिरफ्तारी हो सकेगी. मजिस्ट्रेट पत्नी का पक्ष जानने के बाद ही जमानत दे सकते है. मजिस्ट्रेट को पति और पत्नी के बिच सुलह कराकर शादी बरकरार रखने का भी अधिकार दिया गया है. अदालत का फैसला आने तक बच्चा मां के संरक्षण में रहेगा. इस दौरान पत्नी को गुजारा भत्ता पति को देना होगा. तीन तलाक देने वाले पति को ३ वर्ष की जेल और जुर्माना दोनों ही सजा दी जा सकती है.

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