वास्तुशास्त्र के अनुरूप बनाएं रसोईघर

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घर की सुख-शांति के लिए छोटी-छोटी बातों की ओर ध्यान देना महत्वपूर्ण है, इसीलिए रसोईघर के निर्माण में भी वास्तुशास्र के नियमों का पालन करना जरूरी है।

युवा सिनेमा- युवा भारत की बडी आशा

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भारतीय सिनेमा के बहुरंगी-बहुढंगी यात्रा का एक महत्वपूर्ण अंग है ‘युवा सिनेमा’। ‘युवा’ अर्थात जवानी। मनुष्य के जीवन का सबसे बडा और महत्वपूर्ण दौर। पन्द्रह-सोलह से लेकर पैंतालीस वर्ष की आयु तक के काल को ‘युवा’ माना जाता है।

पैसा और पेड़

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कहावत तो पुरानी और सर्वविदित है कि ‘‘पैसे पेड़ पर नहीं लगते,’’ परन्तु आजकल यह महत्वपूर्ण कथन बनकर विशेष चर्चा में है। जब कोई मामूली सी बात किसी बड़े व्यक्ति के मुखारविंद से निस्सृत होती है, तो खास अहमियत अख्तियार कर लेती है।

टाटा को प्रेरणा देनेवाले स्वामी विवेकानंद

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साधु-संत कहते ही सांसारिक सुखों की ओर पीठ फेरकर पारलौकिक संसार में तल्लीन हुए महापुरुष ऐसा ही समझा जाता है। सांसारिक बातों से उनका कोई लेना-देना नहीं होता ऐसा माना जाता है, लेकिन स्वामी विवेकानंद का जीवन देखा तो ऐसा सोचना ही बड़ी गलतफहमी है, यह कहना पडेगा।

श्योर शॉट

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किसी भी उत्पाद को लोगों तक पहुनचांने में विज्ञापनों का बहुत बड़ा योगदान होता है। प्रतियोगिता के इस दौर में तो इस बात की होड लगी है कि किस उत्पाद का विज्ञापन कितना प्रभावशाली है।

शहीदों की याद का एक खास दिन

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देश की आजादी में अहम भूमिका अदा करने वाले क्रांतिकारियों की सूची बड़ी लंबी है, इसी सूची में एक नाम है बारहठ केसरी सिंह। राजस्थान की भूमि के इस सपूत ने देश को अंग्रेजों की दासता से मुक्त कराने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। क्रांतिकारी बारहठ केसरी सिंह का जन्म 21 नवम्बर,1872 में शाहपुरा के निकट स्थित गांव देवपुरी में हुआ था।

सरस्वती-पुत्र पर लक्ष्मी-पुत्र आसक्त हुआ

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जान डी. राकफेलर भूलोक का मानो कुबेर ही था। वे अमेरिकन तेल सम्राट थे। उन्होंने स्टण्डर्ड आईल कंपनी की स्थापना की। यह कंपनी अमेरिका की सबसे बड़ी तेल कंपनी थी।

मकर-संक्रान्ति पर्व का सांस्कृतिक वैशिष्ट्य

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भारतवर्ष धर्म प्रधान देश है। यहां प्रत्येक पर्व को श्रद्धा, आस्था और उमंग के साथ मनाया जाता है। पर्व एवं त्योहार प्रत्येक देश की संस्कृति तथा सभ्यता के द्योतक हैं।

संगीतज्ञ विवेकानंद

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विवेकानंद की आत्मिक ऊर्जा का स्रोत नाना धाराओं से प्रवाहित होता था। इनमें से एक प्रवाह था संगीत। अन्य कुछ भी न करके यदि उन्होंने केवल स्वरसाधना की होती, तो भी वह अमर हो जाते।जब विवेकानन्द तेईस साल के थे, तभी उनका ‘संगीत कल्पतरू’ नामक ग्रंथ प्रकाशित हुआ था।

राजनीति में दिशा तय करेगी गुजरात विजय

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समूचे भारत देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव में जननेता नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मतदाताओं का स्षष्ट बहुमत मिला है। 2002, 2007 तथा अब 2012 के विधानसभा चुनावों में जीत प्राप्त करने का सम्मान नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व को मिला है।

भारत के समृद्धि की कहानी कहती पुस्तक

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भारत एक धर्मप्राण देश है। यहाँ का सम्पूर्ण जीवनचक्र धर्म के चतुर्दिक घूमता रहता है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को पुरुषार्थ माना गया है। धर्म पूर्वक जीवन-यापन करते हुए अर्थ का उपार्जन करना और उसका त्यागपूर्ण उपभोग करते हुए मोक्ष के पथ पर अग्रसर होना ही नीति के अनुकूल माना गया है। धनोपार्जन के अनेक उपादानों का विवरण भारतीय वांङ्मय में बताया गया है।

बिंब-प्रतिबिंब 

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‘बिंब-प्रतिबिंब’ स्वामी विवेकानंद जी के जीवन पर आधारित आत्मकथात्मक शैली में लिखा गया एक उपन्यास है, जो मराठी के वरिष्ठ और चिर-परिचित लेखक चंद्रकांत खोत की समृद्ध लेखनी से साकार हुआ है। नब्बे के दशक में धूम मचानेवाले इस उपन्यास की उस दौर में खूब बिक्री हुई और मराठी के साहित्यकारों ने इसकी जमकर तारीफ की।

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