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बेस्ट फ्रेंड्स

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सचमुच हमारी ज़िन्दगी में एक सच्चा दोस्त होना बहुत आवश्यक है । दोस्ती ऐसी हो कि हमें पता है कि चाहे कोई भी परिस्थिति आ जाये, ये इंसान हमारा साथ नहीं छोड़ेगा। दोस्त तो कई होते हैं, लेकिन सच्चे अर्थों में बेस्ट फ्रेंड का कर्तव्य निभाने वाले बहुत कम होते हैं।  क्या सभी दोस्त बेस्ट फ्रेंड्स हो सकते हैं? दोस्ती के बारे में जितना कहा जाए कम है । आजकल तो व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर पर दोस्ती के संदेशों की भरमार होती है । लेकिन आख़िरकार दोस्ती होती क्या है ? हमारे दिल में कई बातें होती हैं, कई जज़्बात होते हैं, जो हम

बदलती परंपराओं और त्यौहारों का नया स्वाद

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आज की युवा पीढ़ी, परंपराओं के साथ भले ही हाथों में हाथ डाल कर ना चल रही हो परंतु उन्हें जिंदा रखने की हसरत उनमें है। बस उनका देखने का नजरिया बदल गया है। बदलाव और नयापन हमेशा अच्छा होता है। इससे समाज उन्नति की ओर बढ़ता है। ट्रिंग... ट्रिंग... ट्रिंग... कॉलबेल बजी। उत्साह से नेहा ने दरवाजा खोला। अपनी चारों सहेलियों को देख नेहा का चेहरा खिल उठा। ‘‘कौन आया है बेटी?’’ मां भी कमरे से बाहर आ गई। नेहा ने गांव से आई अपनी मां का सभी सहेलियों से परिचय कराया। बातचीत चल निकली तो त्यौहारों पर आ

कैसा होगा भविष्य का बैंकिंग?

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भविष्य का बैंकिंग पूरी तरह बदल चुका होगा। ग्राहकों के लिए विशिष्ट बैंकिंग अनुभव, जोखिमों और नियमों दोनों का बेहतर प्रबंधन, अत्याधुनिक तकनीक की मदद से गैर-बैंकिंग असंगठित संस्थाओं से प्रतिस्पर्धा करना, यही बैंकों का भविष्य है और तभी बैंक जीवित रह सकेंगे। हमारे बच्चे शायद किसी अलग तरह की बैंकिंग का अनुभव लेंगे। एक बात तो पक्की है कि बैंक शाखाओं का महत्व निकट भविष्य तक ही सीमित रहेगा। उसके बाद उनका महत्व बहुत हद तक कम हो जाएगा। भविष्य में बैंक शाखाएं बहुत अलग तरह की भूमिका अदा करेंगी। जैसे किसी पेचीदा माम

भारतीय पर्यटन की जान : वन पर्यटन

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सम्पूर्ण भारत के वन्य-जीवन का आनंद उठाने के लिए तो शायद कुछेक साल भी कम पड़ेंगे। लेकिन हमारे नियमित पर्यटन स्थलों के कार्यक्रम के साथ यदि हम वन-पर्यटन का कार्यक्रम भी जोड़ दें तो भारत के कुछ महत्वपूर्ण अभयारण्यों का दर्शन करना और कुछ अनोखे जीव-जंतुओं को देखना शायद मुश्किल न होगा। हजारो वर्षों की परंपरा और गौरवशाली इतिहास के साथ-साथ ही, हमारे देश को समृद्धशील भूगोल और सतरंगी प्राकृतिक संपदा का वरदान भी मिला है। जहां एक ओर विदेशी पर्यटकों के लिए हमारा भारत, ताजमहल और अजंता-एलोरा का देश है, आलिशान राजमहलों

भगवद्गीता सबके लिए

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गीता मनुष्यमात्र को आतंकवाद, भोगवाद, पर्यावरण ह्रास, बैरभाव, ईर्ष्या आदि से बचा सकती है। संप्रदाय निरपेक्ष शाश्वत सिद्धांतों को मानव धर्म के तौर पर सिखा सकती है। आने वाले समय मेंं विश्व भगवद्गीता को मानवता की विवेक ग्रंथ के रूप में स्वीकार कर लें तो आश्चर्य की बात नहीं होगी। कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में भयभीत एवं हताश हुए अर्जुन को भगवान श्रीकृष्ण ने गीता सुनाई। महर्षि वेदव्यास रचित महाभारत महाकाव्य का गीता एक हिस्सा है। ‘अर्जुन को युद्ध करने हेतु प्रेरित करना’- यही कृष्ण का उद्देश्य था..

एकात्म मानव दर्शन की प्रासंगिकता

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भारत छोड़ो’ दिवस की ७५वीं वर्षगांठ पर हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के ही मंत्र ‘संकल्प से सिद्धि’ को अब पूर्ण योजना के रूप में अंगीकार कर, २०२२ तक मजबूत, समृृद्ध एवं समावेशी-अर्थात ‘सबका साथ, सबका विकास’- भारत के निर्माण का संकल्प ले लिया है। पं. दीनदयाल उपाध्याय जी का ‘एकात्म मानव दर्शन’, सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक दोनों ही दृष्टि से, एक सर्वकालिक एवं सार्वभौमिक जीवन दर्शन है। इस दर्शन के अनुसार, ‘मानव’ सम्पूर्ण ब्रह्माण

भारतीय जीवनशैली और स्मार्ट सिटी

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वर्तमान शहरों की मूलभूत व्यवस्थाएं मजबूत करना, चौड़ी सड़कें, सुरक्षित और खाली फुटपाथ, मानव सुलभ मार्गदर्शक चिह्न, उचित दूरी पर स्त्री-पुरुष शौचालय, खेल के मैदान, ठोस और तरल कचरे का प्रबंधन और बेहतर सूचना प्रौद्योगिकी संजाल जैसी अनेक व्यवस्थाओं से नागरिकों की जीवन शैली को बेहतर बनाना ही स्मार्ट शहरों की परिकल्पना है। भारतीयों को चाहिए भारतीय संस्कृति और परंपरा को समा लेने वाली स्मार्ट जीवन शैली। किसी बहुत बड़ी जनसंख्या के सामने अगर कोई बात रखनी हो, प्रेरणा देना हो, स्मरण में रखवाना हो तो कुछ प्रतीकों का न

तमसो मा ज्योतिर्गमय…

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आइये, हम सब छोटे-बड़े, धनिक और गरीब सब इस दीपोत्सव में सम्मिलित हों। फिर किसी भी प्रकार के अंधकार को स्थान ही कहां रहेगा? हे भारत मां, हम सब को यही आशीष दो, कि ऐसे सात्त्विक सर्वकल्याणाकारी प्रकाश के पुंज हम बनें और दीपोत्सव सार्थ करें। हमें असत् से सत् की ओर, अंधकार से तेज-प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमरत्व की ओर, अशाश्वत से शाश्वत की ओर ले जाइये। हमारी भारतीय संस्कृति सकारात्मक है इसलिए शाश्वत, तेजयुक्त सत्य की ओर जाने की आकांक्षा, प्रार्थना, प्रेरणा हमारे जीवन की विशेषता है। प्रकाश अर्थात् खुलापन और तमस

बाजार के जानिब आली जनाब

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आम आदमी एक तरह से सीला हुआ बम ही तो है। भ्रष्टाचार, कुशासन, मंहगाई के शोलों में सुलगता रहता है, मगर फटता नहीं। हालांकि उसके चारों ओर की गर्मी कई बार इतनी बढ जाती है कि वह अपनी उच्चतम सीमा पर सुलगने लगता है। देखने वालों लगता है कि अब तो ये जरूर फटेगा। पर नहीं, वह तो बेचार सीला हुआ बम है। फुस्स्स्स..... पटाखे के बाजार में खड़े हैं वे। उनका नाम यहां इसलिए नहीं बताया जा रहा है कि बाजार को उनके नाम से क्या मतलब। उसके लिए अर्थ से समर्थ हर व्यक्ति एक उपभोक्ता है बस! भले ही उसका नाम दिवालिया सिंह या फकीरचंद क्य

भूखे भजन न होय…

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जिंदगी हर मनुष्य का इम्तहान लेती है और किंवदंतियां बनाने वालों को भी सोचने पर मजबूर कर देती है। नहीं तो कभी भूख से मरने वाला यूनान का एक भिखारी ‘होमर’ आज वहां का राष्ट्रकवि बन जाता और भीख मांगने के दौरान गाई जाने वाली लंबी पद्यावलियों का संकलन आज विश्व की सर्वश्रेष्ठ क्लासिक रचनाओं में सर्वोपरि मानी जाती... शाम के पांच बज चुके हैं। धर्मपत्नी जी द्वारा जबरदस्ती कराए जा रहे उपवास या यूं कहूं कि प्रताड़ना की वजह से आंतें आपस में चिपक गई हैं। शरीर की समस्त इंद्रिया, जितनी भी होती होंगी (इस समय य

हमर छत्तीसगढ़!!

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छत्तीसगढ़ की विशेषता है यहां का अपनापन, यहां का आदर-आतिथ्य, यहां की संस्कृति, यहां का भोजन, यहां के वन, यहां के वनवासी, यहां का मौन, यहां का शांत जीवन, यहां के व्रत और यहां के उत्सव। इसलिए पधारो हमर छत्तीसगढ़!!  १ नवंबर २००० यही वह तारीख है जब, एक नए राज्य छत्तीसगढ़ का जन्म हुआ था। केवल १७ वर्ष पहले जन्मे इस राज्य में अछूते पर्यटन स्थलों की भरमार है। आदिवासी और ग्राम्य संस्कृति से सराबोर इस राज्य में आना, किसी स्वर्ग में आने के समान है। शहरी आपाधापी से दूर... मौन, शांति और आनंद के लिए, छत्तीसगढ़ से बेहतर

अद्भुत गोवा

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गोवा के समुद्री किनारे तो अद्भुत हैं। मीरामार समुद्री तट यानी सुनहरी रेत का समुद्री किनारा। यहां के सनबाथ का अनुभव अवर्णनीय है। गोवा की सैर हमेशा सैलानियों की स्मृतियों में छायी रहती है। गोवा का नाम सुनकर ही मन चर्च और समुद्र किनारों की छवि बनाने लगता है परंतु गोवा के मंदिर भी अद्भुत हैं और इन मंदिरों ने ही गोवा की संस्कृति की रक्षा करने का कर्य किया है।  भारत १५ अगस्त १९४७ को स्वतंत्र हुआ फिर भी गोवा में पराधीनता कायम रही। उसके बाद कुछ काल शांति रही परंतु बाद में सन् १९५६ में गोवा लिबरेशन आर्मी की स्थ

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