‘‘भारत के इतिहास में इतना सशक्त प्रधानमंत्री आज तक नहीं हुआ, जितने कि हमारे मनमोहन सिंह है।’’ भोलाराम ने कहा।...
कला एक ज़रिया बन सकती है खुद को बदलने और आत्मचिन्तन का, मानती हैं युवा चित्रकार पूनम अगरवाल। हम समाज...
कहावत तो पुरानी और सर्वविदित है कि ‘‘पैसे पेड़ पर नहीं लगते,’’ परन्तु आजकल यह महत्वपूर्ण कथन बनकर विशेष चर्चा...
भारत एक धर्मप्राण देश है। यहाँ का सम्पूर्ण जीवनचक्र धर्म के चतुर्दिक घूमता रहता है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष...
‘बिंब-प्रतिबिंब’ स्वामी विवेकानंद जी के जीवन पर आधारित आत्मकथात्मक शैली में लिखा गया एक उपन्यास है, जो मराठी के वरिष्ठ...
नयना कनोडिया का जन्म यद्यफि फुणे में हुआ, किन्तु वे मूलत: राजस्थान की हैं । वे एक ऐसे फारम्फरिक मारवाड़ी...
मैं ठहरा सीधा सरल गंवई इन्सान। थिंक और थिंकिंग से मेरा पूर्व जन्म में भी कोई संबंध नहीं रहा; पर...
‘राष्ट्रगुरु समर्थ रामदास और छत्रपति शिवाजी महाराज’ मराठी के जाने माने लेखक, वक्ता, आध्यात्मिक चिंतक श्री सुनीलजी चिंचोलकर की बहुचर्चित...
राजधानी की बहुचर्चित चित्रकार कंचन चन्द्र का कहना है कि ‘कला सामाजिक स्थितियों से उत्पन्न होती है। कला का सर्जक...
भारत के प्राचीन महानतम संस्कृत के महाकवि साहित्यकार कालिदास मध्यप्रदेश की उज्जयनी नगरी से जुड़े और सर्वकालिक श्रेष्ठतम रचनाओं की...
यद्यफि शुक्ला चौधुरी शान्तिनिकेतन में अर्फेाा स्नातक की फढाई फूरी नहीं कर फाईं, किन्तु वहां उन्हें कला के तमाम महत्वफूर्ण...
लोककला को महाराष्ट्र में मूल्यवान वैभव की तरह सम्हाल करके रखा गया है। यहां इन कलाओं का उद्भव ग्रामीण-लोकरंजन और...
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