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धार्मिक स्थलों पर असमानता

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महिलाओं के शनि मंदिर या शबरीमाला के प्रवेश का विचार करते समय मस्जिद और मजार पर महिला प्रवेश, अन्य पंथियों से विवाह करने वाली पारसी महिला का अग्यारी में प्रवेश, धर्मगुरू के स्थान पर ईसाई महिला को पाबंदी जैसे विषयों पर भी चर्चा होना अनिवार्य लगता है। केवल हिंदू समाज को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है।

‘स्व’ का स्मरण, क्षरण और जागरण

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महिलाएं अगर अपने ‘स्व’ का स्मरण रखें, उसका निरंतर जागरण करें और उसका क्षरण होने से बचाएं तो महिलाओं की और साथ ही साथ सारे समाज की परिस्थिति में बदलाव निश्चित होगा।

कुकिंग ऑयल से जुड़ी ये ख़ास बातें जानते हैं आप?

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भारतीय किचन में खाना बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ कुकिंग ऑयल को माना जाता है। इसका इस्तेमाल देश में हर प्रकार के क्यूज़ीन में होता है। कुकिंग ऑयल ही मसालों के स्वाद को उभारता है और स्वाद को दुगुना बना देता है।

चूल्हे से चाँद तक

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महिलाओं को राष्ट्र की मुख्य धारा में आने के लिए खुद अपने हितों को समझना और अपने अधिकार हासिल करने के लिए आगे बढ़ना होगा। जबतक महिलाओं के लिए बनने वाली योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी नहीं होगी, योजना सफल नहीं हो सकती।

माओवादियों के चंगुल में फंसी महिलाएं

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दंडकारण्य में कई वर्षो से आतंक का पर्याय बनी माओवादी नर्मदाक्का नामक महिला को आख़िरकार पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की हैं। उस पर हत्याकांड के इतने गंभीर अपराध दर्ज है कि उसे जमानत मिलना भी मुश्किल है। साथ ही, नर्मदाक्का का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। जेल में कब तक वह रह पाएगी, यह कहना मुश्किल है। उनकी गिरफ्तारी से माओवादी गतिविधियों में भारी खलबली मच गई। वह माओवादी महिला मोर्चा की प्रमुख थीं

भोग्य नहीं अब योग्य हूं

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आज की नारी समय की मांग के अनुरूप बनाने का प्रयास कर रही है। नगरीय, महानगरीय, भौतिकवादी और भूमंडलीय संस्कृति में महिला सशक्तिकरण का एक प्रभावशाली दौर चल रहा है।

कभी ‘देवी’ तो कभी ‘दासी’ – अपने अस्तित्व को संघर्षशील है आज भी स्त्री

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मुद्दा ये है कि अब स्त्री को सम्मान सहित उसका बराबरी का स्थान देकर क्या- क्या हासिल हो सकता है। और ये मुद्दा किसी एक परिवार या किसी एक देश  का नहीं, वरण पूरे विश्व का है क्योंकि भले ही हमारी भाषा अलग हो , पहनावा अलग हो, जन्मभूमि अलग हो, देश अलग हो, संस्कृति अलग हो लेकिन आख़िरकार हम सभी एक ही अटूट सूत्र में बंधे हुए हैं और वो सूत्र है 'मानवता'।

संघर्ष से सफलता तक महिलाओं का सफर

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हिंदुस्तान मेलों और त्योहारों का देश कहा जाता है। विश्व परिपेक्ष्य में बदलते समय के अनुरूप हिंदुस्तान भी दिवसों का देश बनता जा रहा है। हिंदी दिवस, फादर्स डे, मदर्स डे, वैलेंटाइन डे और महिला दिवस इसी पंकि में आ चुका है। प्रत्येक वर्ष 8 मार्च को महिला दिवस मनाने…

अकेले ही थामी पालने की डोरी

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नन्हें शुभम ने रूआंसे होकर पूछा-"मम्मी सबके पापा साथ रहते हैं फिर मेरे क्यों नहीं ?" उसका प्रश्न सुनकर संगीता की आँखें भर आई थी पर आँसू गिराकर वह बच्चे के सामने स्वयं को कमजोर नहीं दिखाना चाहती थी,यदि वही हिम्मत हार गई तो बच्चे की परवरिश किस तरह कर…

कामकाजी महिलाओं की फैशन

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महिलाएं जॉब क्या करने लगीं, कई वर्गों में बंट गईं। गरीब, अर्ध-मध्यम और मध्यम वर्ग के अपने-अपने पैमाने बन गए। उनके फैशन के भी मानक बदल गए। माना कि हर सिक्के के दो पहलू हैं- नकारात्मक और सकारात्मक। जरा देखें कहां पहुंचना चाहते हैं हम-

मुस्लिम महिलाओं के पेहराव और फैशन

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इस्लामी संस्कृति में परिधानों के कई प्रकार हैं। उन पर भी तरह-तरह की कारीगरी से चार चांद लग जाते हैं। गत कुछ वर्षों से ब्यूटी कांटेस्ट- सौंदर्य स्पर्धाओं- में इस्लामी लिबास में महिला स्पर्धक भाग लेती दिखाई देती हैं। इस्लामी फैशन डिझाइनें भी बदलते समय के अनुसार बदल रही हैं।

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