केवल बछिया पैदा करने की जादुई तरकीब रक्षक या भक्षक?

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एक तरफ देश के कई राज्यों में गोवंश की हत्या को लेकर बड़े कानून बनाए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ देश में नर गोवंश पर  अपराध बढ़ता ही जा रहा है क्योंकि मशीनीकरण की वजह से बैलों का प्रयोग करीब-करीब खत्म हो गया। लेकिन प्राकृतिक या ऑर्गेनिक खेती के बढ़ते प्रचलन से बैलों के प्रयोग की एक नई आशा जागी है।

महाराष्ट्र का मैनचेस्टर इचलकरंजी

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देश में आर्थिक क्षेत्र में जीएसटी सबसे बड़ा परिवर्तन था, जहां पूरे हिंदुस्तान में इसका विरोध हुआ पर इचलकरंजी वस्त्र व्यवसाइयों ने पहले दिन से जीएसटी में काम शुरू कर दिया। हर सरकारी योजना को समझना उनका फायदा लेना इचलकरंजी का स्वभाव है और इसके पीछे कारण है कि यहां सम्पूर्ण व्यवसाय बैंक से ही होता है।

प्रगति की मिसाल भीलवाड़ा टेक्सटाइल उद्योग

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भीलवाड़ा जिला काफी समय से पानी की कमी के चलते डार्क जोन में रहा है। अत: यहां नए प्रोसेस की अनुमति प्रशासन द्वारा नहीं दी जा सकती। इसलिए कपड़ा फिनिश करवाने के लिए यहां के उद्यमियों को बालोतरा भेजना पड़ता है परंतु पिछले दो-तीन वर्षों में कुछ क्षेत्रों में पानी की कमी दूर हुई है, परंतु इसका तहसील के अनुसार पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है। जिससे नए प्रोसेस हाउस की अनुमति मिल सके।

नई उंचाईयों को छुएगा भिवंडी वस्त्रोद्योग

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1950-1995 तक का समय भिवंडी के वस्त्र उद्योग के लिए समृद्धि का काल था। उस समय भिवंडी को ’मैनचेस्टर’ के रूप में जाना जाता था। निश्चित ही ’मेक इन इंडिया’ तथा ’आत्मनिर्भर भारत’ योजनाओं के कारण निकट भविष्य में भिवंडी वस्त्र उद्योग फिर नई ऊचाइयां छूएगा।

तांबे की गागर

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तांबे के उस गागर सी थी सिया, जिसमें पानी केवल रखा भी रहे तो शुद्ध ही होता है। उसकी आंखों की चमक किसी पहाड़ी झील सी लगती थी और होंठों पर जब मुस्कुराहट आती तो लगता था कि मानो कई दिनों बाद बर्फ की ठंडक को तोड़ती पहाड़ की धूप खिली हो। उसके आने से ही तो इतनी रौशनी आई थी जीवन में कि हर एक क्षण किसी पूजा की थाली के दिये सा रौशन था।

आत्मनिर्भर भारत बनाने हेतु वस्त्र मंत्रालय कटिबद्ध

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भारत सरकार समेत 16 राज्यों ने एक छत के नीचे चार लाख लोगों को कुशल बनाने का संकल्प लिया है। वस्त्र से जुड़े जिन क्षेत्रों में लोगों को कुशल बनाया जाएगा उनमें तैयार परिधान, बुने हुए कपड़े, धातु हस्तकला, हथकरघा, हस्तकला और कालीन शामिल हैं। वस्त्र उद्योग मंत्री स्मृति ईरानी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हमेशा से यह प्रयास रहा है कि नए भारत में हम यह सुनिश्चित करें कि अजीविका की इच्छा रखने वाला हर नागरिक कुशल और दक्ष हो।

प्रगति की ओर अग्रसर मर्दा ग्रुप

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मर्दा बंधुओं ने अरविंद ब्राण्ड धोती के व्यवसाय पर अपना ध्यान केंद्रित किया और उसके लिये खूब मेहनत की। रणनीतिक और तकनीकी रुपसे परिश्रम कर उन्होंने अपने व्यापार को पुरे भारतवर्ष में फैलाया। कुछ ही समय में धोती किंग के रुप में विख्यात हुए। उस समय धोती बहुत ही लोकप्रिय वस्त्र हुआ करता था, जिसे भारत के ह्रदय को छुने वाला वस्त्र भी माना जाता था।

पल्लू रस्म

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यह बात विचारणीय है कि पिता के मरने पर यदि बेटे के सिर पर पगड़ी बांधी जाती है, तो सास के बाद उसकी बहू के सिर पर पल्लू क्यों नहीं रखा जाता? शर्माजी के गांव वालों ने एक रास्ता दिखाया है। इस पर विचार होना चाहिए।

भारत के वस्त्रोद्योग का भविष्य

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कोविड-19 की स्थिति में फेस मास्क और पीपीई कवरऑल जैसे बुनियादी उत्पादों के लिए भारत को स्थानीय मांगों को पूरा करने में संघर्ष करना पड़ा। अन्य देश जैसे वियतनाम, मलेशिया और इंडोनेशिया जो तकनीकी वस्त्रों के लिए ज्यादा जाने नहीं जाते हैं, इन मेडिकल डिस्पोजबल्स की आपूर्ति करके बड़ी मात्रा में यूएसडी राजस्व पैदा कर रहे हैं। निर्यात प्रतिबंधों में हालिया बदलाव के साथ, भारत ने भारी संख्या में पीपीई किट का निर्यात करना शुरू कर दिया है।

भारतीय वस्त्र उद्योग और निवेश के अवसर

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भारतीय निर्मित वस्त्र और हस्तशिल्प कई देशों को निर्यात किए जाते हैं। निर्यात के लिए अमेरिका प्राथमिक बाजार है, लेकिन देशों की कुल संख्या 100 तक है। निर्यात में 41% हिस्सेदारी के साथ रेडीमेड वस्त्र सबसे बड़ा खंड है। कपड़ा मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार, भारत ने पिछले साल की तुलना में 7% की वृद्धि के साथ 17 बिलियन अमेरिकी डॉलर का कपड़ा निर्यात किया।

कपड़ा उद्योग जैसा नहीं है दूसरा कोई उद्योग- महेश पाटोदिया एम.डी., पाटोदिया विविंग मिल्स प्रा. लि.

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केंद्र सरकार और राज्य सरकार की जो योजना है वैसी योजनाएं पहले कभी नहीं बनी। इतनी बढ़िया योजनाएं सरकार ला रही है मगर उसे अमल में लाने में अड़चन आ रही है। सरकार ने अनेक प्रकार की सहुलियते देकर अपना काम कर दिया है। उद्योग-व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी, इलेक्ट्रिसिटी, निर्यात में सुविधाएं, ब्याज दर में कमी आदि सरकार की तरफ से ठोस पहल की गई है लेकिन सरकारी बाबूओं की ओर से बहुत तकलीफ है, इसका समाधान होना चाहिए।

भारतीय वस्त्र परंपरा का भविष्य बहुत उज्ज्वल है – विकास खेतान (संचालक, नीलकंठ फैब्रिक्स)

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विश्व में बहुत से विकासशील देश है या विकासशील देश बनने की कतार में हैं, उनके पास फैब्रिक्स मैन्युफैक्चरिंग की सुविधाएं नहीं है। विकसित देशों में मूल्य इतना अधिक होता है कि वह बाहर से आयात करना पसंद करते है। हमारे यहां टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज जो इतनी प्रगति कर रही है उसके पास बहुत ही अच्छा मौका है। वह अपने आपको निर्यात करने के काबिल बनाए तो बहुत आगे बढ़ सकती है।

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