जन सहयोग से सूखा लातूर ‘जलयुक्त’ बना

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महाराष्ट्र के मराठवाड़ा संभाग के लातूर शहर ने भूकम्प और सूखा इन दोनों संकटों का सामना किया है। यहां तक कि पिछले वर्ष लातूर में ट्रेन से पानी लाकर लोगों की प्यास बुझानी पड़ी। इससे सचेत होकर लातूर के सूज्ञ नागरिकों ने जन सहयोग से ऐसा चमत्कार करवाया कि मांजरा नदी लबालब भर गई। प्रस्तुत है इस परियोजना के बारे में श्री अशोक कुकडे (वरिष्ठ संघ स्वयंसेवक) से हुई बातचीत के महत्वपूर्ण अंश, जो सूखाग्रस्त गांवों के लिए पथ प्रदर्शक होंगे।

खिलता कमल

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देश में ४ फरवरी से लेकर ८ मार्च तक लोकतंत्र तक सब से बड़ा उत्सव होने जा रहा है। सब से बड़ा उत्सव इसलिए कि देश के लगभग २० फीसदी मतदाता पांच राज्यों में हो रहे इन विधान सभा चुनावों में अपने प्रतिनिधि चुनेंगे। मतदाताओं की संख्या कुल १६.८ करोड़ होगी। कुल ६९० स

कहीं पर्यावरण अभियान को ट्रम्प नकारात्मक दिशा तो नहीं देंगे?

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विज्ञान से मानव की प्रगति होती है? इस प्रश्न का उत्तर खोजें तो पता चलेगा कि ‘विज्ञान की गति के साथ मानव मन की प्रगति नहीं हो रही है और यही सब से बड़ा रोड़ा है। ’ स्थिति क्या वाकई वैसी ही है? उसमें सुधार हुआ है या अधोगति हुई है? यह प्रश्न हम स्

ई-कचरा निर्मूलन तथा पुनर्प्रयोग

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हम सभी जानते हैं कि २१ वीं सदी सूचना एवं प्रसारण तंत्र की सदी है। मानव ने आज विज्ञान में बहुत प्रगति कर ली है। इस प्रगति के कारण जीवन निर्वाह सुलभ हो गया है। परिवहन के साधनों के कारण यात्रा करना और टेलीफोन व इंटरनेट के कारण संवाद साधना आसान हो गया है। दूर

अधिकतम अक्षय ऊर्जा निर्माण करने वाले राज्य

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आजकल तेल से तैयार की हुई ऊर्जा का ऑटो चलाने के लिए और कोयले से निर्माण की हुई ऊर्जा का अन्य कामों में इस्तेमाल हो रहा है। तेल और कोयला दोनों का उगम अहरित है और ये पर्यावरण का संतुलन बिगाड़ते हैं। इसीलिए दुनिया में हरित ऊर्जा देने वाले उगमों की बहुत आवश्य

क्या राजनीति को धर्म से जुदा रखना संभव है?

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हाल में उच्चतम न्यायालय ने धर्म के नाम पर वोट मांगने को अवैध करार देने वाला फैसला सुनाया है। राजनीति और धर्म एक दूसरे से इतने उलझे हुए हैं कि उन्हें जुदा धर्म के नाम पर वोट मांगना अवैध होने के उच्चतम न्यायालय के ताजा फैसले में नया कुछ भी नहीं है। बांसी

विकास और पर्यावरण में टकराव न हो

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मुझे लगता है पर्यावरण प्राण जैसा है। जैसे शरीर में प्राण अनिवार्य है; प्राणों के बगैर शरीर संभव नहीं है और प्राण की उपस्थिति सामान्यतः लोगों को अनुभव इसलिए नहीं आती क्योंकि वह सहज प्राप्त होता है। लेकिन प्राण की शुद्धता, प्राण की उपलब्धता, अनुभव, ये सब महत्वपूर्ण है। मुझे लगता है पर्यावरण उसी प्रकार है।

प्रदूषण : नियंत्रण व उपाय

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आज विश्व में पर्यावरण प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंता एवं बहस की जा रही है। पर्यावरणविदों के मन में प्रदूषित होते शहरों के बारे में गहरी चिंता उभर रही है। प्रदूषण एक प्रकार का अत्यंत धीमा जहर है जो हवा, पानी, धूल आदि के माध्यम से न केवल मनुष्य के शरीर में प

पहले प्रदूषण नियंत्रण, फिर स्मार्ट सिटी

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रोटी, कपड़ा, मकान ये मानव की तीन मूलभूत आवश्यकताएं हैं। पहली दो आवश्यकताएं प्रकृति से बड़े पैमाने पर उपलब्ध होती हैं। तीसरी याने निवास, इसकी पूर्ति मानव को स्वत: करनी पड़ती है। इस तीसरी आवश्यकता की पूर्ति हेतु मानव द्वारा प्रकृति का दोहन प्रचुर मात्रा में

उत्तर प्रदेश का चुनावी दंगल

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उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा एवं मणिपुर में जल्द ही राज्य विधान सभा चुनावों की प्रक्रिया प्रारंभ होने जा रही है और चूंकि ये चुनाव केन्द्र की मोदी सरकार को नोटबंदी की घोषणा के महज तीन महीनों के अंदर ही कराए जा रहे हैं इसलिए भारतीय जनता पार्टी के

अमेरिका से ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बढ़ा

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ग्लोबल वार्मिंग से मौसम का बदलता मिजाज पृथ्वी पर मानव सभ्यता के लिए खतरे की घंटी है। वैज्ञानिकों में यह मान्यता मजबूत हो चुकी है कि जलवायु बदलाव व इससे जुड़े कई अन्य गंभीर संकट (जैसे जल संकट, जैव विविधता का हाल और समुद्रों का अम्लीकरण) अब धरती की जीवनदाय

ग्लोबल वार्मिंग के खतरे

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विश्व के महान वैज्ञानिक आइंस्टीन ने कहा था कि दो वस्तुएं असीमित हैं- पहला ब्रह्मांड और दूसरा मानव द्वारा की जाने वाली मूर्खताएं। भूमंडलीय ऊष्मीकरण (ग्लोबल वार्मिंग) भी मानव के भौतिक विकास की अंधी दौड़रूपी मूर्खता का ही परिणाम है। भूमंडलीय ऊष्मीकरण का अर्

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