चाय पर चर्चा

Continue Readingचाय पर चर्चा

चाय एक पेय पदार्थ मात्र नहीं, त्यौहार है। हर आम भारतीय के दिन की शुरुआत चाय से ही होती है। साहित्य और सांस्कृतिक कर्मी तो चाय के बिना कोई विचार-विमर्श, आयोजन ही सम्पूर्णता के साथ नहीं कर सकते। चाय का सबसे बड़ा गुण है कि यह लोगों को तोड़ती नहीं बल्कि जोड़ती है। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘चाय पर चर्चा’ कार्यक्रम के जरिए इसे एक अलग ऊंचाई दे दी है।

तुम बिन जिया जाए ना!

Continue Readingतुम बिन जिया जाए ना!

मोबाइल ने हमारे जीवन में उपयोगिता से लेकर लत तक की यात्रा तय कर ली है। मोबाइल से आधे घंटे दूर रहना अब किसी सजा से कम नहीं लगता। मोबाइल सूचनाओं के संवाहक की जगह अब विभिन्न शारीरिक और मानसिक बीमारियों का जनक भी बनता जा रहा है। समय रहते अगर हम सचेत नहीं हुए तो हम मोबाइल के नहीं, बल्कि मोबाइल हमारा मालिक बन जाएगा।

मादक, परंतु घातक मुफ्तखोरी का नशा

Continue Readingमादक, परंतु घातक मुफ्तखोरी का नशा

मुफ़्त का शब्द बेशक सुख देता हो, पर इसकी अति बहुत खराब है। दुनिया के अनेक देश जनता को प्रभावित करने के लिए टैक्स घटाने और मुफ़्त बांटने का दंड भोग रहे हैं। भारत में भी कुछ राजनीतिक दलों के कुचक्र का असर दिखाई देने लगा है। वोटों के लालच में भारत के राज्य फ्री फ्री के जाल में फंसकर केंद्र और बैंकों से लिया गया धन वापस लौटाने की स्थिति में नहीं हैं।

अजान से परेशान हर इंसान

Continue Readingअजान से परेशान हर इंसान

मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतारे जाने के सामाजिक मुद्दे को छद्म सेक्युलर और मुसलमान धार्मिक रंग दे रहे हैं जबकि उन्हीं लाउडस्पीकरों पर हनुमान चालीसा बजाए जाने को सामाजिक द्वेष की संज्ञा दी जा रही है। यानी उनका मजहब और उससे सम्बंधित बातों को लेकर अन्य धर्म भले सहिष्णुता अपनाएं लेकिन वे अपने एक्सक्लूसिव दायरे से बाहर आने की कोशिश नहीं करेंगे।

इतिहास की भूलों की ओर इशारा करता काव्य संग्रह

Continue Readingइतिहास की भूलों की ओर इशारा करता काव्य संग्रह

राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय अनेक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत, सम्मानित, राष्ट्रवादी विचारधारा के पोषक, प्रखर चिंतक, मनीषी, गत दो दशकों से अधिक से सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे विनोद बब्बर ने अब तक 18 देशों की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक यात्राएं की हैं। इनकी प्रकाशित 37 पुस्तकों में से 8 पुस्तकों का विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।

पीएफआई की कलंक कथा

Continue Readingपीएफआई की कलंक कथा

पिछले कुछ वर्षों के दौरान देश में हुई दंगाई घटनाओं के पीछे इस्लामी संगठन, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का हाथ होना चिंता का विषय है। इसकी जड़ें सिमी की तरह ही पांव पसारती जा रही हैं। केरल सरकार का छद्म सहयोग भाव भी इसके बढ़ाव के पीछे एक बड़ा कारण है। कई अन्य राज्य भी इसकी चपेट में हैं। इसका प्रभाव राष्ट्रव्यापी हो, उसके पहले ही इसकी जड़ें काटने की आवश्यकता है।

असहाय पशुओं को चाहिए सहारा

Continue Readingअसहाय पशुओं को चाहिए सहारा

भारत में पशुओं की संख्या में निरंतर बढ़ोत्तरी होती जा रही है पर उस अनुपात में पशुचिकित्सकों की संख्या काफी कम है। लोगों का जीवन स्तर विकसित होने के साथ ही विगत दो दशकों से देश में कुत्ते, बिल्लियों समेत अन्य जानवर पालने का भी शौक बढ़ा है। इसलिए देशभर में पशु चिकित्सकों की नई पीढ़ी तैयार किए जाने की आवश्यकता है। 

अखंड भारत की अवधारणा भूगोल गौण, संस्कृति प्रधान

Continue Readingअखंड भारत की अवधारणा भूगोल गौण, संस्कृति प्रधान

पश्चिमी परिवेश में रंगी वर्तमान पीढ़ी के लिए राष्ट्र का अर्थ जमीन का टुकड़ा मात्र है इसीलिए उन्हें अखंड भारत अप्रासंगिक लगता है जबकि राष्ट्र व राष्ट्र-राज्य के बीच के अंतर को समझने की आवश्यकता है। अखंड भारत का अर्थ जमीन का टुकड़ा नहीं है बल्कि जिन देशों में पहले सनातन संस्कृति प्रवाहमान थी, वहां एक बार फिर से सनातन संस्कृति जीवन का आधार बन सके।

एक परिवार दुर्दशा के लिए जिम्मेदार

Continue Readingएक परिवार दुर्दशा के लिए जिम्मेदार

श्रीलंका इस बात का जीता जागता उदाहरण है कि यदि राजनीति में परिवारवाद और जनता को मुफ्तखोरी की आदत लगाने जैसी दीमक लग जाए तो वह किस तरह एक राष्ट्र को कंगाली की हद तक खोखला कर सकती है। क्या भारतीय राजनीति इससे बच पाएगी?

बांग्लादेश बनता बंगाल

Continue Readingबांग्लादेश बनता बंगाल

बंगाल में बढ़ती हिंसा इस बात की द्योतक है कि देश का यह राज्य बहुत तेजी से बांग्लादेश बनने की दिशा में बढ़ रहा है। केंद्र सरकार को ममता बनर्जी सरकार के इस ‘खेला’ के प्रति सावधान होने तथा तत्काल बल प्रयोग करने की आवश्यकता है। यदि अभी नहीं चेता गया तो बंगाल की आग अन्य राज्यों को भी अपनी चपेट में ले सकती है।

सत्ता परिवर्तन से नहीं बदलेगा पाकिस्तान-भारत को रहना होगा सतर्क

Continue Readingसत्ता परिवर्तन से नहीं बदलेगा पाकिस्तान-भारत को रहना होगा सतर्क

भारत के प्रति चिर स्थायी शत्रुता पाल रखे पाकिस्तान की वर्तमान राजनीतिक उथल-पुुथल भारत के लिए कत्तई शुभ नहीं है। नव निर्वाचित प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ का चीन प्रेम किसी से छिपा नहीं है। इमरान खान भी हार मानने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में डर है कि, अपनी नाकामियां छुपाने के लिए पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकी घटनाओं में तेजी ला सकता है।

युद्ध का क्या होगा परिणाम?

Continue Readingयुद्ध का क्या होगा परिणाम?

रूस-यूक्रेन युद्ध का लम्बा खिंचना पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय है। इसका असर न केवल कच्चे तेल और खाद्य पदार्थों के दाम पर पड़ेगा बल्कि एक बार फिर विश्व द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वाली अस्थिरता की ओर बढ़ रहा है। विगत कुछ दिनों से राष्ट्रपति पुतिन के साथ परमाणु बटन का दिखना गम्भीर संकेत है। इसलिए भारत समेत सभी शक्तिशाली राष्ट्रों को आगे बढ़कर इसे रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

End of content

No more pages to load