गौशाला-पांजरापोल की आधुनिक आदर्श व्यवस्था

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 अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि गोशाला-पांजरापोल की आधुनिक आदर्श व्यवस्था कैसे की जाए और उन्हें स्वावलंबी व आत्मनिर्भर कैसे बनाया जाए? जिससे उन्हें गोशाला संचालन में आसानी हो और सहजता से वह गोसेवा कर पाए। जिसमें सभी प्रकार की अत्याधुनिक सुख सुविधा भी मौजूद हो।

अपराधियों का महिमा मंडन कब तक

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  सुशांत सिंह राजपूत के मामले में एक तथाकथित बड़े चैनल ने मुख्य आरोपी को बैठाकर हास्यास्पद सवाल पूछे। कुछ ही दिन पहले दिल्ली दंगे के मुख्य आरोपियों में से एक को उसी टीवी चैनल ने स्थान दिया था। यही नहीं इसी टीवी चैनल ने कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा मारे गए एक आतंकवादी के बारे में बताया था कि वह गणित का शिक्षक था। और भी कई घटनाएं बताकर उसके आतंकवादी होने के गुनाह पर लीपापोती करने का प्रयास किया। 

वाराणस्यां तु विश्वेशं

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  आनन्द कानन या आनन्द वन के नाम से संबोधित किए जानेवाले मानव सभ्यता के प्राचीनतम नगर काशी के सबसे महत्वपूर्ण धर्म स्थलों में से एक काशी विश्वनाथ धाम आज सम्पूर्ण विश्व के सनातन हिंदुओं के लिए परमानन्द का कारण बन गया है।

सरकारी नियंत्रण से कब मुक्त होंगे मंदिर?

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देश के साधु संतों ने अब इस कमान को संभाल लिया है तो हमें विश्वास है कि हिन्दुओं के आस्था केन्द्र मंदिरों पर से सरकारी नियंत्रण से मुक्ति मिलेगी और इसका आगाज उत्तराखंड की सरकार के इस आदेश से हो गया है कि राज्य के चारों धाम में आने वाले मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाता है। 

फंडिंग एजेन्सी के हाथों में आंदोलन

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इस तरह एनजीओ में धीरे-धीरे फंडिंग एजेन्सी का दबाव अधिक बढ़ने लगा और आंदोलन समाज के हाथ से निकल गया। वर्ना देश में कोई भी आंदोलन समाज से कट कर कैसे चल सकता है? जैसे दिल्ली में हाल में ही सीएए और एनआरसी के खिलाफ आंदोलन चला। जिसकी वजह से लाखों लोगों की जिन्दगी प्रभावित हुई। स्कूल बस, एम्बुलेन्स तक को शाहीन बाग आंदोलन में बाधित किया गया। क्या महीनों ऐसे रास्ता बंद करके बैठे लोगों के समूह को आंदोलन कह सकते हैं, जिस आंदोलन में कोई मानवीय पक्ष दिखाई ना देता हो। 

कोरोना वायरस का चिंताजनक वैरिएंट ओमीक्रॉन

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इस ओमीक्रॉन वैरिऐंट में बड़ी संख्या में म्युटेशंस हैं जो किसी संक्रमण अथवा टीकाकरण के उपरांत विकसित उदासीनकारी यानी न्यूट्रलाइज़िंग एंटीबॉडीज़ और चिकित्सीय मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज़ का विरोध कर सकते हैं। इसके स्पाइक प्रोटीन के विभेदन स्थल के आस- पास भी म्यूटेशन के समूह देखे जाते हैं। यह स्पाइक प्रोटीन वायरस को कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है। कोरोना वायरस जितनी आसानी से कोशिकाओं में प्रवेश करते हैं उतनी ही तेजी से उनका उत्पादन भी होता है और उनकी संचारक क्षमता भी बढ़ जाती है।

पंजाब का चुनावी गणित

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इधर भाजपा में आए दिन किसी न किसी महत्वपूर्ण सिख नेता का आगमन हो रहा है। पहले ही शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महत्वपूर्ण पदाधिकारी मनजिंदर सिंह सिरसा भाजपा के हो चुके है। वही अब हरभजन और युवराज सिंह के आने की चर्चा फिजाओं मे तैर रही है किंतु पिछले चुनावों में कुल जमा दों सीट वाले भाजपा के लिए पंजाब अभी भी दूर की कौड़ी नजर आ रही है।

लोकतांत्रिक चेहरों पर एकशाही की मासूमियत

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लोकतंत्र का शिखर तलहटी को थोड़ा-थोड़ी सरकाता रहता है। न बर्फ खिसके, न वोट बैंक। परिवार उठता चला जाए। साधारण सीं झोंपड़ी से निकलकर हजारों करोड़ की मिलकियत कैसे बन जाती है! पर चेहरे पर जनवाद लहलहाता है।   

नियमन के दायरे में होना चाहिए मोबाइल टैरिफ

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प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां अपना मजबूत कार्टेल बनाकर उपभोक्ताओं को तिल-तिल करके मार रहीं हैं क्योंकि कोरोना के बाद वैसे भी देश में आम आदमी मंहगाई की मार से त्रस्त है, ऐसे समय में टैरिफ में बढ़ोतरी को वापस लिया जाना चाहिए। कुल मिलाकर मोबाइल टैरिफ सरकारी नियमन के दायरे में होना चाहिए अन्यथा ये टेलीकॉम कंपनियां कभी भी मनमानी कर सकतीं हैं जो आम आदमी के जेब पर भारी पड़ेगी।

फास्ट ट्रैक कोर्ट कितना फास्ट?

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उस समय देश की सभी अदालतों में लगभग 3 करोड़ मामले लंबित थे और उन्हें सुलझाने में मदद करने के लिए तत्कालीन भारत सरकार ने 5  साल की अवधि के लिए देश भर में लगभग 1700 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की मंजूरी दी। इन फास्ट ट्रैक अदालतों ने कुशलता से काम करते हुए लाखों मामलों को द्रुत गति से हल किया।

उत्तराखंड के सियासी हालात, कांटे का मुकाबला

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भले ही मुख्य मंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है लेकिन चुनाव में बीजेपी के लिए चेहरा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ही रहेंगे। साथ ही इस बार सत्ता जिसके भी हाथ लगे जीत हार का फैसला बहुत अधिक नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में दोनों मुख्य प्रतिद्वंद्वी दलों कांग्रेस और बीजेपी में टिकट बंटवारे और उससे उत्पन्न हालत भी चुनाव पर स्थानीय स्तर पर बहुत असर डालेंगे। उसी के बाद तस्वीर साफ होती नजर आएगी।

एक अनवरत सांस्कृतिक प्रवाह है अखंड भारत

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कुल मिलाकर अगर हम अखंड भारत चाहते हैं तो भारतीय संस्कृति जो हिंदू संस्कृति है उसे अपना मानदंड बनाकर चलना होगा। दीनदयाल जी के अखंड भारत के स्वप्न् को साकार करने के आह्वान का आज पुन: स्मरण करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा था, ... हमें हिम्मत हारने की जरूरत नहीं। यदि पिछले सिपाही थके हैं तो नए आगे आएंगे।

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