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मैं एक मीसा बंदी

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“समाज का जाति अनुसार विचार करने वाले प्रगतिशील महानुभावों द्वारा संघ को मनुवादी कहते देखकर मेरे क्रोध की सीमा न रही। हिंदू समाज का अस्तित्व उन्हें स्वीकार नहीं था। परंतु जातीय अहंकार, जातीय भावना भड़काने से उन्हें कोई एतराज नहीं था। जातीय भावना भड़काकर समता पर आधारित समाज रचना करने का उपदेश करना यह उनके ढोंगीपन की सीमा थी।”

आपातकाल (26 जून १९७५) का आधुनिक संदर्भ

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वर्तमान पीढ़ी को चूंकि यह जानने का अधिकार है कि आपातकाल में आखिर क्या हुआ था, अतः इसे पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। इससे जो बातें छनकर आएंगी, वे तत्कालीन प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की स्वेच्छाचारिता, अतिमहत्वाकांक्षा तथा पदलोलुपता को तो प्रदर्शित करेंगी ही, कांग्रेस के शासन की करतूतें भी सामने आएंगी।

हजार हाथों वाला आधुनिक देवता-डॉ. अच्युत सामंता

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ओडिशा के निवासी डॉ. अच्युत सामंता खुद एक ऐसे विश्वविद्यालय हैं जहां से ज्ञान, संकल्प, साहस, समर्पण, धर्म, अध्यात्म, संघर्ष और सफलता की कई धाराएं एकसाथ निकल रही हैं। उनके संघर्ष की दास्तान सुनें तो ऐसा लगता है मानो ये हजार हाथ वाले किसी देवता की कहानी है।

क्लाउड कम्प्यूटिंग

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       वर्तमान गतिमान विश्व में जहां रोज एकसाथ मिलना संभव नहीं होता है, वहां क्लाउड तकनीक के कारण प्रत्येक क्षण उत्तम जानकारी मिलना सहज संभव हो गया है। स्पर्धात्मक विश्व में आगे बढ़ने हेतु इसका उपयोग महत्वपूर्ण एवं आवश्यक है।

प्लास्टिक का दानव

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    प्लास्टिक का कूड़ा भारत ही नहीं विश्व के लिए समस्या बना बैठा है और उससे निजात पाने के लिए विभिन्न कदम उठाए भी जा रहे हैं, लेकिन अभी माकूल विकल्प मौजूद नहीं है। यदि पर्यावरण को बचाना है तो इस दानव से मुक्ति का मार्ग खोजना ही होगा।

अति उपयोग के कारण प्लास्टिक बना प्रदूषण

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प्लास्टिक ने भूतल पर ही नहीं, समुंदरों और अंतरिक्ष में भी हाहाकार मचा दिया है। सारी दुनिया में इसे रोकने के प्रयास चल रहे हैं, विभिन्न विकल्पों पर ध्यान दिया जा रहा है, कई नए अनुसंधान हो रहे हैं। इससे आनेवाले समय में अवश्य ही कोई माकूल जवाब खोज लिया जाएगा, लेकिन तब तक हमें सावधानी बरतना जरूरी है।

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