हिंदी विवेक पंजीयन शुल्क वार्षिक - 500 रु, त्रैवार्षिक - 1200 रु, पंचवार्षिक - 1800 रु, वार्षिक विदेशी सदस्यता - 5000 रु, आजीवन - 20,000 रु
हिंदी विवेक पंजीयन शुल्क वार्षिक - 500 रु, त्रैवार्षिक - 1200 रु, पंचवार्षिक - 1800 रु, वार्षिक विदेशी सदस्यता - 5000 रु, आजीवन - 20,000 रु
दिनांक 1 फरवरी 2026 को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार द्वारा भारतीय संसद में प्रस्तुत किए जाने...
भारत में भी हाल ही के वर्षों में मध्यमवर्गीय परिवारों की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज हुई है। परंतु, मुद्रा...
मिथिला संस्कृति, भाषा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में शुभसीता फाउंडेशन उल्लेखनीय कार्य कर रही है और अन्य...
मिथिला में सड़क, रेलवे, हवाई अड्डे और जलमार्ग के द्वारा यातायात-परिवहन की सीमित सुविधा है, इसलिए इन सुविधाओं को बढ़ाने...
आजीविका और समृद्ध जीवनशैली की आस में निकले प्रवासी मैथिली देश-दुनिया में रच-बस गए है, लेकिन आज भी उन्होंने मिथिला...
वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन पूरे विश्व के लिए चिंता और चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन इस संदर्भ...
खेती के तकनीक में एक और बड़ा परिवर्तन आया और वैज्ञानिकों ने बीज के बजाय पौधे के पत्ते या तनों...
आणंद कृषि विद्यापीठ ने लगभग पौने तीन करोड़ खर्च करके ‘सॉइल हेल्थ कार्ड’ का सॉफ्टवेयर तैयार किया। किसानों ने केवल...
भारत में मौसम व त्योहार जीवन के अभिन्न हिस्से हैं। उनमें से एक है मकर संक्रांति का त्योहार। जिसमें सूर्य...
Read moreDetailsडायबिटीज में ज़रूर शामिल करें ये 6 सब्ज़ियाँ - डायबिटीज को कंट्रोल में रखने के लिए दवाओं के साथ-साथ सही...
कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर के किसी अंग की कोशिकाएं अनियंत्रित और अनियमित रूप से बढ़ने लगती हैं...
अपनी किसी एक इंद्रिय के साथ वर्तमान क्षण में रहें:दृष्टि, गंध, ध्वनि और स्वाद – आप आश्चर्यचकित होंगे कि जब...
बच्चे को जन्म देने का सौभाग्य केवल नारीशक्ति को ईश्वर ने प्रदान किया है। लेकिन डिलीवरी के दौरान होनेवाले भयानक...
मकर संक्रांति को हम केवल एक उत्सव मानते हैं, जबकि उसका ऋतु-जलवायु-सौर परिवर्तन से लेकर वैज्ञानिक, खगोलीय सम्बंध व महत्व...
किसी भी स्वस्थ समाज का निर्माण क्रांति से नहीं बल्कि संक्राति से होता है। किसी से टकराव नहीं बल्कि सहअस्तित्व...
स्वामी विवेकानंद हमें अपनी आध्यात्मिक शक्ति में विश्वास रखने के लिए प्रेरित करते हैं। वे राष्ट्र निर्माण से पहले मनुष्य...
विवेकानंद के लिए धर्म कर्मकांड नहीं, बल्कि सेवा था— “दारिद्र नारायण की सेवा ही ईश्वर की सच्ची पूजा है।” आध्यात्मिक...
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